
मसूरी न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को करीब 55 मामलों का आपसी सहमति के आधार पर निस्तारण किया गया। लोक अदालत में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138, क्रिमिनल कंपाउंडेबल केस और मोटर व्हीकल एक्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई की गई।
न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज ने बताया कि उच्च न्यायालय एवं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत समय-समय पर राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है, ताकि लोगों को त्वरित और सस्ता न्याय मिल सके। उन्होंने बताया कि इस बार दो बड़े मामलों में करीब साढ़े 34 लाख रुपये का समझौता कराया गया। उन्होंने कहा कि नियमित अदालतों में मामलों के निस्तारण में लंबा समय और अधिक खर्च होता है, जबकि लोक अदालत में दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त कर लेते हैं। इससे कोर्ट का समय बचता है और पक्षकारों के बीच मनमुटाव भी खत्म होता है।
सिविल जज मनोज राणा ने कहा कि लोक अदालत को लेकर अब लोगों में जागरूकता बढ़ रही है और बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से लोक अदालत में पहुंचकर समझौते योग्य मामलों का समाधान कराने की अपील की।

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