उत्तराखंड पुलिस को मित्र पुलिस यू ही नही कहा जाता बल्कि मुसीबत के समय पुलिस मित्रवत व्यवहार करती है इसलिए मित्र पुलिस का दर्जा दिया जाता है इसका ताजा उदाहरण रूद्रप्रयाग के श्री केदारनाथ धाम मे देखने को मिला जंहा पर नेपाल सरकार के पूर्व सांसद बिना कीसी पूर्व सूचना और प्रोटोकाल के एक आम श्रद्धालु की तरह बाबा के दर्शन करने पहुचे लेकिन उम्र के इस पडाव मे पैदल ना चल पाने के कारण किराये के घोडे के माध्यम से केदारनाथ पहुंच गये लेकिन बाबा के धाम पहुंचकर उन्हे याद आया कि उनके 25000/ रूपये घोड़े मै ही छूट गये जिसकी सूचना पूर्व सांसद ने केदारनाथ चौकी मे दी लेकिन अपना परिचय फिर भी जगजाहिर नही किया सूचना मिलते ही केदारनाथ चौकी पुलिस ने कडी मेहनत करते हुए घोडे और उसके संचालक को ढूंढ कर उनके पैसे वापस कराये अपने खोये पैसे वापस मिलने के बाद नेपाल सरकार के पूर्व सांसद ने खुले दिल से उतराखंड पुलिस की तारीफ कर रूद्रप्रयाग पुलिस को धन्यवाद दिया।

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