मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 में भारतीय मानक संस्था के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज देश की औद्योगिक, वैज्ञानिक और आर्थिक प्रगति की मजबूत आधारशिला के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बीआईएस द्वारा मानकीकरण, प्रमाणीकरण और गुणवत्ता परीक्षण के माध्यम से न केवल उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाया गया है, बल्कि उपभोक्ताओं के जीवन में भरोसे और सुरक्षा की भावना को भी सुदृढ़ किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मानकीकरण का क्षेत्र केवल उद्योग जगत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा, ऊर्जा, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन एवं डिजिटल सेवाओं तक विस्तृत हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा डिजिटल सुरक्षा, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन, रिसाइकिल सामग्री एवं हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समयानुकूल मानक तय कर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति 2025 लागू की गई है। राज्य के सभी 13 जनपदों के 95 ब्लॉकों में लगभग 180 विज्ञान, तकनीक इंजीनीयरिंग एवं गणित आधारित प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं। सभी जिलों में साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग प्रारंभ की गई है, जिससे सैकड़ों छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। प्रत्येक जनपद में एक-एक ‘लैब-ऑन-व्हील्स’ संचालित की जा रही है। विभिन्न विश्वविद्यालयों व केन्द्रों में 60 पेटेंट सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं। सीमांत क्षेत्रों में विज्ञान आधारित विकास के लिए ‘सीमांत क्षेत्र विकास परिषद’ का गठन किया गया है। साइंस महोत्सवों का आयोजन अब पर्वतीय जनपदों तक विस्तारित किया गया है, इस वर्ष यह महोत्सव रुद्रप्रयाग में हुआ। वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जनपद में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार केन्द्रों की स्थापना हेतु बजट आवंटित किया गया है। राज्य में शीघ्र विज्ञान व नवाचार आधारित प्रसारण प्रारंभ किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में बनने वाली देश की पाँचवीं साइंस सिटी के निर्माण कार्य को उल्लेखनीय गति मिली है। भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से 175 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना आकार ले रही है। महिला प्रौद्योगिकी केन्द्रों की स्थापना भी प्रारंभ की जा चुकी है। राज्य में केन्द्रीय संस्थानों से विज्ञान व नवाचार संवाद को नई गति दी गई है। सिलक्यारा के अभियान में अपनाए गए विज्ञान-प्रौद्योगिकी आधारित रेस्क्यू मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है और इसी पर आधारित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। आज राज्य के हर कोने विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ा गया है।

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