August 30, 2025

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चुनावी मैदान में उतरे सियासी योद्धा, तीन प्रतियाशियों के बीच है मुख्य मुकाबला।

गुलशन सागर (राष्ट्रीय दिया समाचार)गंगोह

सहारनपुर , सियासी दिग्गज नेताओं के अलावा कुछ ऐसे लोग भी चुनाव मैदान में हैं जिनका पहले कोई चर्चा भी सुनने में नही आया। चुनाव की तिथि आते ही ये प्रत्याशी वरिष्ठ समाज सेवी बन गये है। उनमें कुछ पालिका अध्यक्ष पद एंव सभासद पद के दावेदारों में हैं। लेकिन मैदान-ए-जंग में तो योद्धा ही जीत के लड़ते हैं।
बहरहाल सोमवार को गंगोह नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद के लिए सभी पार्टियों से प्रतियाशियों ने नामांकन दाखिल किये।

पालिका अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किए जाने के साथ सियासी संग्राम का शंखनाद हो चुका। और दिलचस्प ये है कि उस दल के प्रत्याशी भी जीत का दावा कर रहे हैं, जिनके सियासी खलिहान में एक अनाज का दाना तक नहीं है। सियासी टीकाकारों का कहना है कि चैयरमेन की कुर्सी के लिए भाजपा, बसपा और सपा-रालोद गठबंधन पार्टी में ही घमासान होना है। बाकी दलों की अपने पार्टी कार्यालयों के बाहर न धमक है न धमाका।
बताने की जरूरत है कि गर्मी के गरूर के बीच सियासत पार्टी कार्यालयों से निकल कर सड़कों-गलियों और चौक-चौराहों तक पहुंच गई है। सोमवार को चैयरमेन पद पर प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के परचा भरने के बाद सियासी मैदान लगभग सज गया। सत्तानशीं भाजपा और बसपा के साथ समाजवादी पार्टी और जनाधार से छिटकी कांग्रेस के उम्मीदवार ने भी ताल ठोक दी है। अब चैयरमेन कौन बनेगा, यह तो वक्त बताएगा किंतु निकाय चुनाव का यह सियासी संग्राम भाजपा के योद्धाओं और हाथी के महावतों तथा सपा-रालोद के सूरमाओं के बीच माना जा रहा है। कांग्रेस अपेक्षाकृत कमजोर हालत में है। गौरतलब है कि गंगोह में पिछले कई दशकों से काजी परिवार गुट का परचम लहराता आ रहा है। काजी परिवार या उनके समर्थित लोग ही चैयरमेन की कुर्सी पर काबिज रहे। दूसरे दलों के लिए इस सीट को कब्जाना बड़ी चुनौती है। भाजपा ने कविता सैनी को प्रत्याशी बनाया और इस बहाने एक शिक्षित उम्मीदवार को उम्मीदों की डोंगी पर सवार किया है। भाजपा के नगर कार्यकर्ताओं ने चुनाव में जीत हासिल करने के लिए रणनीति बनानी शुरू करदी है है। बूथ-बूथ तक, जातीय समीकरणों को साधने के साथ हर सम्भव किला फतह करने की योजना बनाई है। लेकिन भाजपा का पाला काजी खानदान से समर्थित पूर्व चैयरमेन रुश्दा बैगम की पुत्रवधू शाजिया से है। जानकारों का कहना है कि शाजिया प्रत्याशी जरूर हैं लेकिन, लड़ाई पूर्व चैयरमेन नौमान मसूद के नाम है। गंगोह क्षेत्र में नौमान मसूद किसी परिचय के मोहताज नहीं। दलित और मुस्लिम समाज के साथ अन्य बिरादरी के वोट बैंक को अपने खजाने में करने के लिए नौमान मसूद की फौजों ने मोर्चा संभालल लिया है। उधर,भाजपा की सेना ने भी बसपा को नाको चने चबवाने की ठान ली है। बहरहाल, इस लड़ाई को दिलचस्प बनाने के लिए सपा-रालोद गठबंधन ने आरएलडी के प्रदेस सचिव हाजी सलीम की भतीजी शमा प्रवीण को मैदान में उतारा है। एक तरह से हाजी सलीम ही को चुनाव का मुख्य चेहरा माना जाए तो गलत ना होगा। इन्होंने भी अपने सिपहसालारों को पूरी तरह मुस्तेद कर चुनाव में सरगर्मी पैदा कर दी है। ये सूरमा क्या गुल खिलाएंगे, यह तो वक्त बताएगा,,,

अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला ,,
“जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा,,

राजनीतिज्ञों के मुताबिक चुनावी संग्राम तीन पार्टीयो के बीच ही होगा। अगर कांग्रेस और अन्य पार्टीयों की बात करें तो इनका जनाधार खाली-खाली सा है।

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