
उत्तराखंड 2015 में हुई दरोगा भर्ती घोटाले में अब नये नये खुलासे हो रहे हैं। एसटीएफ की गिरफ्त में आए पूर्व भाजपा नेता हाकम सिंह, सादिक मूसा, रामनगर निवासी स्टोन क्रशर मालिक चंदन सिंह मनराल और हल्द्वानी निवासी पंतनगर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रवक्ता दिनेश चंद्र जोशी ने कई राज उगले हैं। सूत्रों की मानें तो इन आरोपितों ने बताया है कि दारोगा भर्ती में उन्होंने कई युवाओं को नौकरी दिलाई। दिनेश चंद्र जोशी के माध्यम से परीक्षा के लिए अधिकृत पंतनगर विश्वविद्यालय के पशु विज्ञान महाविद्यालय के डीन नरेंद्र सिंह जादौन से संपर्क किया गया। नकल माफिया और परीक्षा कराने वालों के बीच गठजोड़ हो गया था। एक अभ्यर्थी को पास कराने के लिए आठ लाख रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक सौदा हुआ। 15 लाख रुपये देने वालों को टापरों की सूची में वरीयता तक मिल गई। आठ लाख रुपये देने वालों को भी अंतिम चरण में नियुक्ति मिल गई।
विजिलेंस की रडार में आये कई फर्जी दलोगा इस मामले में अब नैनीताल जिले की दो महिला दारोगा विजिलेंस की राडार पर हैं। ये दारोगा टापरों की सूची में शामिल रहीं। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार सबसे ज्यादा 2015 बेच के 46 दारोगाओं की पोस्टिंग ऊधम सिंह नगर में हैं। नैनीताल जिले में 38 दारोगा तैनात हैं। अब मुकदमा दर्ज होने के बाद ये दारोगा अपने आकाओं की शरण लेने लगे हैं, तो कुछ हाइकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। विजिलेंस भर्ती घपले में शामिल दरोगाओं का ट्रैक रिकार्ड खंगालने में जुटी है। सूची में जिन-जिन दरोगाओं के नाम शामिल हैं उनके बारे में पूछताछ की जा रही है। उनकी शैक्षिक योग्यता के साथ पारिवारिक बैकग्राउंड भी खंगाला जा रहा है। इनकी जल्द गिरफ्तारी हो सकती है

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