
देहरादून को यू तो” एजूकेशन हब ” कहा जाता है जहा पर बच्चो को निसंदेह अच्छी शिक्षा दी जाती हो लेकिन संस्करो का आभाव साफ झलकता है वही राजधानी का एक स्कूल ऐसा भी है जो बच्चो को अच्छी शिक्षा,संस्कार,अच्छे चरित्र निर्माण के साथ साथ पौराणिक त्योहारो का भी ज्ञान देता है

इसी कडी मे न्यू दून ब्लोशम स्कूल ने दशहरे पर्व का क्या महत्व है क्यो मनाया जाता है इसके पीछे क्या कहानी है बडे सरल तरीके से बाल मन को समझाने का सुंदर प्रयास किया आपको बता दे कि दशहरा (विजयादशमी व आयुध-पूजा) हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है

यह राक्षस राजा रावण पर भगवान राम की विजय और राक्षस महिषासुर पर मां दुर्गा की जीत को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है । दशहरा दो संस्कृत शब्दों “दशा” और “हारा” से आया है, जहां दशा का अर्थ है दस (रावण के दस सिर का जिक्र) और हारा का अर्थ है हार (रावण की हार) आज की पीढी को रामयाण काल के महत्व को समझाने के लिए ही न्यू दून ब्लोसम स्कूल ने दशहरे के मौके पर फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमे छोटे बच्चे रामायण के पात्र जैसे राम,लक्ष्मण, सीता हनुमान रावण सबरी इत्यादि के रूप मे आये , इसके बाद व्यवहार कुशल क्लास टीचर ने सभी बच्चो के पात्र के अनुसार सुंदूर सुंदर फोटो अभिनय सहित लेकर इस पर्व को चार चांद लगा दिये जिसके चलते स्कूल का प्रांगण राममंय हो गया स्कूल प्रशासन ने इन बच्चो के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन पर बच्चो को प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी मे बांट कर पुरस्कृत किया जिसे दशहरा उत्सव का नाम दिया गया इस उत्सव का आनंद बच्चो ने तो लिया ही साथ ही साथ अभिभावको का उत्साह देखते ही बन रहा था


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