April 23, 2026

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मसूरी की विरासत बचाने के लिए मसूरी ट्रेडर्स एंड एसोसिएशन उठाया कदम,300 वर्ष पुराने लंढोर का नाम ना बदलने के लिए सी.ई.ओ, लैंडौर कैंट को सौपा ज्ञापन !

सुनील सोनकर (राष्ट्रीय दिया समाचार) मसूरी

मसूरी की करीब 300 वर्ष पुरानी पहचान “लैंडौर” का नाम बदले का विरोध करते हुए मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल के समर्थन ने यूनियन के दर्ज़ेनो कार्यकर्ताओ ने अंकिता सिंह,सी.ई.ओ, लैंडौर कैंट,को लैंडौर का नाम बदलने के विरुद्ध अपील करते हुए कहा की लैंडौर, अपने 300 वर्षों से अधिक के समृद्ध इतिहास के साथ, महज एक नाम नहीं बल्कि इस क्षेत्र की पहचान, संस्कृति और विरासत का प्रतीक है। जैसा कि हम जानते हैं, वर्तमान नाम को बनाए रखने के लिए मजबूत ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक कारण हैं। यह भी समझा जाता है कि “लैंडौर” नाम केवल औपनिवेशिक मूल का नहीं है और इसका संबंध रुड़की के पास स्थित लान्धौरा जैसी स्थानीय जड़ों से हो सकता है।इसके अलावा, लैंडौर में एक सदी से अधिक पुराने संस्थान हैं, जिनसे हजारों पूर्व छात्र, कर्मचारी और परिवार गहराई से जुड़े हुए हैं। हम में से कई लोगों के लिए, यह महज एक जगह नहीं, बल्कि जीवन भर का जुड़ाव और यादों से भरा घर है।ऐसे समय में जब हमारा ध्यान पहाड़ों के संरक्षण और नाजुक पर्यावरण की रक्षा पर होना चाहिए, ऐसे ऐतिहासिक स्थान का नाम बदलना अनावश्यक और दुर्भाग्यपूर्ण प्रतीत होता है।रजत अग्रवाल ने बताया की अखबारों में प्रकाशित सार्वजनिक सूचना के अनुसार, यह निवेदन 24 अप्रैल से पहले अपेक्षित है, इसलिए हम, मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य, आपसे निवेदन करते हैं कि लैंडौर कैंट का नाम न बदलें और इसका अस्तित्व बचा के रखने का प्रयास कर रहे है यूनियान के अध्यक्ष ने अपनी आपत्तियों को 7 बिन्दुओ के माध्य्म से बताया

1. वित्तीय लागत और आर्थिक दबाव – किसी जगह का नाम बदलने में आधिकारिक साइनबोर्ड, राजमार्ग बोर्ड, नक्शे बदलने और सरकारी रिकॉर्ड को अपडेट करने के लिए भारी खर्च शामिल होता है, जिसे सार्वजनिक धन की अनावश्यक बर्बादी के रूप में देखा जा सकता है।

2. प्रशासनिक उलझन और असुविधा – नाम बदलने से निवासियों, आगंतुकों और डाक सेवाओं के लिए दीर्घकालिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। निजी व्यवसायों को ब्रांडिंग, वेबसाइटों और कानूनी दस्तावेजों को अपडेट करने में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बोझ का सामना करना पड़ता है।

3. सांस्कृतिक विरासत और इतिहास का नुकसान – नाम बदलने से इतिहास के मिटने का भय भी है। नाम बदलने से स्थानीय स्मृति, भूगोल या ऐतिहासिक घटनाओं से भी नाता टूट जाता है।

4. अप्रासंगिक या ध्रुवीकरणकारी प्रेरणाएँ – नाम बदलने से वास्तविक नागरिक मुद्दों को संबोधित करने के बजाय स्थानीय आपसी प्रेम भाव को लक्षित करते हैं।

5. ब्रांड पहचान का नुकसान – लोकप्रिय पर्यटन स्थलों या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त लैंडौर, मसूरी के लिए, नाम बदलने से ब्रांड मूल्य नष्ट हो सकता है और पर्यटन पर निर्भर व्यवसायों को नुकसान पहुंच सकता है।

6. जनभावना और रीति-रिवाज – परिचित नामों को बदलना उचित नहीं है, क्योंकि इससे भावनात्मक और सांस्कृतिक प्रतिरोध उत्पन्न हो सकता है।

7. जनभागीदारी का अभाव: स्थानीय निवासियों से पर्याप्त परामर्श या राय लिए बिना नाम बदलने का निर्णय लेने पर अक्सर आपत्तियां उठाई जाती हैं, जो की हमारे द्वारा और क्षेत्र के हजारों नागरिकों द्वारा किया जा रहा है। ज्ञापन देने वालों मे रजत अग्रवाल, जगजीत कुकरेजा, नागेंद्र उनियाल, अतुल अग्रवाल, सलीम अहमद,दर्ज़ेनो लोगो ने भाग लिया

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