November 2, 2026

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मसूरी में पहले से लगे क्रॉस बैरियर के पास ही एमडीडीए लगा रहा रेलिंग, जनता के लाखों रूपये के इस्तेमाल पर उठे सवाल स्थानीय लोगों ने बताया सरकारी धन की बर्बादी, प्रस्ताव तैयार करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और निर्माण कार्य रोकने की मांग’’.!

सुनील सोनकर (राष्ट्रीय दिया समाचार ) मसूरी

पहाड़ों की रानी मसूरी में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। इस बार मामला मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की ओर से बडे मोड से पिक्चर पैलेस तक सड़क किनारे लगाई जा रही रेलिंग का है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस स्थान पर एमडीडीए रेलिंग लगा रहा है, वहां लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) पहले से ही क्रॉस बैरियर लगा चुका है। इसके बावजूद महज कुछ दूरी पर दोबारा रेलिंग लगाने का औचित्य समझ से परे है। लोगों ने इसे सरकारी धन के अनावश्यक खर्च का मामला बताते हुए पूरे कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क किनारे पहले से लगे क्रॉस बैरियर और प्रस्तावित रेलिंग के बीच लगभग आधा फीट का अंतर है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब वहां सुरक्षा के लिए पहले से बैरियर मौजूद हैं तो दूसरी रेलिंग लगाने की जरूरत क्यों पड़ी? लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में सड़क किनारे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी थी तो उन स्थानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी, जहां रेलिंग या बैरियर नहीं हैं और दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इस कार्य के लिए तैयार प्रस्ताव में जरूरत और स्थल की वास्तविक स्थिति का ठीक से आकलन नहीं किया गया। उनका कहना है कि कुछ महीने पहले इसी क्षेत्र में रेलिंग के अभाव में एक कार दुर्घटनाग्रस्त होकर नीचे गिर गई थी। इसके बाद क्षेत्र में रेलिंग लगाने की मांग और प्रस्ताव दिया गया था। सामाजिक कार्यकर्ता गौरव गुप्ता के अनुसार शुरुआत में करीब 300 मीटर क्षेत्र में रेलिंग लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर लगभग दो किलोमीटर कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रस्ताव की लंबाई बढ़ाने का आधार क्या रहा और क्या इसके लिए मौके पर सुरक्षा संबंधी जरूरतों का सही आकलन किया गया?

लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि रेलिंग लगाने के दौरान सड़क किनारे पहले से बने कंक्रीट के हिस्सों को तोड़कर उनमें रेलिंग फिट की जा रही है। निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और कार्य की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यस्थल पर गुणवत्ता जांच और तकनीकी निरीक्षण की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि सरकारी धन से होने वाले निर्माण का वास्तविक लाभ जनता को मिल सके।

क्षेत्रीय सभासद सचिन गुहेर ने कार्य पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एमडीडीए के अधिकारियों की कार्यप्रणाली का उदाहरण मौके पर देखा जा सकता है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि पहले से क्रॉस बैरियर लगे होने के बावजूद उसी स्थान पर रेलिंग लगाने का प्रस्ताव किस आधार पर तैयार किया गया। यदि जांच में सरकारी धन का अनावश्यक खर्च या किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और नियमानुसार धनराशि की वसूली भी हो।

स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता गौरव गुप्ता ने कहा कि उनके क्षेत्र में कुछ महीने पहले रेलिंग नहीं होने के कारण एक कार नीचे गिर गई थी। इसके बाद उन्होंने संबंधित स्थान पर रेलिंग लगाने का प्रस्ताव दिया था। उनका आरोप है कि जिस हिस्से में वास्तव में रेलिंग की जरूरत थी, वहां प्राथमिकता देने के बजाय पहले से लोक निर्माण विभाग के क्रॉस बैरियर लगे क्षेत्र में भी रेलिंग लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वह इस कार्य का विरोध करेंगे और जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आवाज उठाएंगे।

स्थानीय लोगों ने एसडीएम मसूरी से पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर निर्माण कार्य की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सबसे पहले यह स्पष्ट किया जाए कि रेलिंग लगाने का प्रस्ताव किस अधिकारी ने तैयार किया, इसकी तकनीकी स्वीकृति किस आधार पर दी गई और कार्य की गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है। साथ ही जांच पूरी होने तक कार्य को रोकने और जरूरत के अनुसार ही आगे निर्माण कराने की मांग की गई है।

स्थानीय निवासी और अधिवक्ता अरविंद ने बताया कि मसूरी जैसे पहाड़ी शहर में सीमित संसाधनों का उपयोग वास्तविक जरूरतों के अनुसार होना चाहिए। सड़क किनारे जहां दुर्घटना का खतरा है, वहां सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए, न कि पहले से बैरियर लगे स्थानों पर दोबारा निर्माण कर सरकारी बजट खर्च किया जाए।

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