September 4, 2026

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एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण की राह में कानूनी अड़ंगा नाकाम, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका.!

सुनील सोनकर (राष्ट्रीय दिया समाचार )मसूरी

मसूरी एमपीजी कॉलेज के प्रांतीयकरण को लेकर नगर पालिका परिषद मसूरी के प्रस्ताव को चुनौती देने की कोशिश को उत्तराखंड हाईकोर्ट से झटका लगा है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अनुज गुप्ता बनाम उत्तराखंड राज्य व अन्य मामले में दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया।

नगर पालिका के अनुसार, याचिकाकर्ता ने कॉलेज के प्रांतीयकरण के लिए पालिका बोर्ड की ओर से पारित प्रस्ताव को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि उनके पक्षकार के पास इस प्रस्ताव को चुनौती देने का वैधानिक अधिकार (लोकस स्टैंडी) नहीं है। इसके बाद याचिका पर आगे जोर नहीं देने की बात कही गई। इस पर न्यायालय ने दो सितंबर को याचिका खारिज करते हुए इससे जुड़े लंबित प्रार्थना पत्रों का भी निस्तारण कर दिया।

पालिका के प्रस्ताव को मिली राहत

हाईकोर्ट के फैसले से पालिका के उस प्रस्ताव को फिलहाल राहत मिली है, जिसके तहत एमपीजी कॉलेज को प्रांतीयकरण की दिशा में आगे बढ़ाने की पहल की गई है। पालिका का कहना है कि प्रांतीयकरण से कॉलेज को बेहतर शैक्षणिक संसाधन और सुविधाएं मिलने के साथ विद्यार्थियों के हित में संस्थान को अधिक मजबूती मिल सकती है।

पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि कॉलेज के भविष्य और विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रांतीयकरण की पहल की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग निजी हितों के चलते इस प्रक्रिया में अड़चन डालने का प्रयास कर रहे हैं।

हालांकि, हाईकोर्ट में याचिका खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि एमपीजी कॉलेज का प्रांतीयकरण पूरा हो गया है। अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से याचिका आगे न बढ़ाने के अनुरोध के बाद उसे खारिज किया है। अब प्रांतीयकरण की प्रक्रिया शासन स्तर पर आगे बढ़ेगी और सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेती है।

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