प्रशासन के भ्रष्टाचार का नतीजा…..
पैसे ऐंठने के लालच में डॉक्टर ने ले ली मासूम की जान
परीक्षित गुप्ता(राष्ट्रीय दिया समाचार) बिजनौर
डाक्टर को समाज मे भगवान का दर्जा दिया जाता है इसके पीछे वजह है कि डाकटर अपने मरीज की जान बचाने के लिए अपनी जान लगा देता है अपने मरीज के इलाज को लेकर इतना संजिदा रहता है कि एक आवाज मे हाथ मे लिया हुआ खाने का निवाला छोड कर मरीज की नब्ज टटोलने पहुंच जाता लेकिन इस पवित्र पेशे को कुछ नापाक लोगो ने नाले के पानी से भी गंदा और कलंक से भी काला कर दिया इसी तरह का एक मामला सामने आया उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर के चांदपुर मे जहा डाक्टर की लापरवाही से चांद जैसे नवजात शिशु की मौत हो गई और हंसते खेलते परिवार की खुशियां मातम में बदल गई लेकिन फिर भी ऐसे डॉक्टर अपनी लापरवाही से बाज नही आ रहे है ।
आपको बता दें कि चांदपुर स्थित सरगम सिनेमा के सामने डां मनु बस्सी का बच्चों का वाइटल हस्पिटल हैं । इस अस्पताल मे 31 दिसंबर की रात्रि लगभग 10.30 बजे जलीलपुर निवासी पत्रकार गौरव कुमार अपने नवजात शिशु को इलाज के लिए भर्ती कराया था जहां अस्पताल में डां मनु बस्सी ने बच्चे को भर्ती करते समय पत्रकार पिता से बताया कि उनके बच्चे की हालत नाजुक है और बच्चे को कम से कम 48 से 72 घंटे तक मशीन में रखना बहुत जरूरी है मरता क्या ना करता पत्रकार पिता ने डाक्टर मनु बस्सी की बात को सही मान कर के अपने नवजात शिशु को मशीन मे रखवा दिया लेकिन पिता का आरोप है कि दो दिन बाद भी जब नवजात शिशु की तबियत ठीक नही हुई तो मजबूर पिता ने अपने बच्चे को कही बाहर दिखाने की बात कही बस फिर क्या था रूपयो का लालची डॉक्टर इतना सुनते ही भड़क गया और बच्चे को निक्कू नर्सरी से डिस्चार्ज नही किया ताकि बच्चा को कोई बाहर कही ले जा सके लेकिन डॉक्टर की लापरवाही व फर्जी इलाज से 6 दिन बाद भी बच्चे की तबियत ठीक नही हुई और बच्चे की मौत मशीन के अन्दर ही मौत हो गई जिसके बाद अस्पताल प्रशासन के हाथ पैर फूल गए । आरोप है कि डॉक्टरों ने बच्चे के इलाज के करीब 50 हजार रुपये लेकर परिजनो को बुलाकर मृत बच्चे को परिजनो के सुपुर्द कर दिया और कही और ईलाज कराने की बात कही । जब परिजनो ने बच्चे को अपने हाथो मे लिया तो बच्चा निष्प्राण लगा जिसके बाद परिजनो ने डाक्टर से बात करने की कोशिशे की मगर डाक्टर ने परिजनो से मिलने तक से मना कर दिया डाक्टर और अस्पताल स्टाफ के इस रवैये से नाराज परिजनो ने बीती शाम चांदपुर कोतवाली पहुंचकर मौजूद अधिकारी को अपनी आपबीती सुनाकर लिखित तहरीर दोषी डां मनु बस्सी के खिलाफ देकर सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही करने की अपील की जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने परिजनो को कार्यवाईका भरोसा दिलाया और परिजनो को कोतवाली से विदा कर दिया लेकिन सूत्र बताते है कि पूर्व में भी इस अस्पताल में ऐसे कई कांड हो चुके है परन्तु भ्रष्ट प्रशासन के चलते ऐसे दबंग लोग अस्पताल के नाम पर मौत के अड्डे खोल कर मासूम बच्चो की जान से और परिजनो के माल को ऐठने मे लागातार कामयाब हो रहे है फिलहाल परिजनो की तहरीर पर पुलिस और स्वास्थ्य महकमा क्या कोई कारवाई करता है या फिर मौत के सौदागर को यू ही निरंकुश खुला छोड कर कुछ और घरो का चिराग बुझने का इंतजार करता है ये तो आने वाले वक्त मे ही पता चलेगा लेकिन ये सच कि कभी ना कभी भगवान कीसी गुस्सैल इन्सान के रूप मे आकर इस अस्पताल को मटियामेट जरूर कर देगा तब शायद पुलिस महकमा और स्वास्थ्य विभाग देखते रहने के अलावा और कुछ ना कर पायेगा क्योकि जिसके घर का चिराग बुझता है उस दर्द को कोई महसूस नही कर सकता बस अंदाजा ही लगा सकता है और अंदाजा हमेशा सही नही हो सकता।
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