August 30, 2025

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फैसला: अपनों को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाले हरमीत को फांसी की सजा

देहरादून, 05 अक्टूबर।

सात साल पहले दीवाली की काली रात में अपने परिवार के 5 सदस्यों को बेरहमी से मौत के घाट उतारने वाले हरमीत को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है।
दीपावली की रात जब लोग अपने घरों को रोशन कर रहे थे। वहीं उस रात को हरमीत ने बड़ी बेरहमी से अपने परिजनों का कत्ल कर दिया था। इस जघन्य हत्याकांड में हरमीत की बहन के गर्भस्थ शिशु की भी मौत हो गई थी। अपर जिला जज पंचम आशुतोष मिश्रा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अभियोजन की ओर से अधिकतम सजा फांसी की मांग की गयी यही। शासकीय अधिवक्ता राजीव गुप्ता ने बताया कि हत्याकांड 23-24 अक्तूबर 2014 को कैंट थाना क्षेत्र के आदर्शनगर में हुआ था। यहां होर्डिंग कारोबारी जय सिंह का मकान है। इस मकान में जय सिंह, उनकी पत्नी कुलवंत कौर, बेटी हरजीत कौर, नातिन सुखमणि (3), नाती कंवलजीत सिंह (5) और बेटा हरमीत (जय‌ सिंह की पहली पत्नी का बेटा) रहते थे। दीवाली से अगले दिन घर के अंदर से कोई बाहर नहीं निकला था। जब नौकरानी राजी वहां पहुंची तो उसने देखा कि घर में खून ही खून फैला हुआ था। वह अंदर गई तो वहां हरजीत कौर, सुखमणि, जय सिंह और कुलवंत कौर के लहुलूहान शव पड़े हुए थे। हरमीत वहीं पर खड़ा था जबकि पांच साल का कंवलजीत भी डरा सहमा हुआ खड़ा था। यह सब नजारा देखकर वह चिल्लाती हुई बाहर आई। आसपास के लोग भी वहां इकट्ठा हो गए। पास में रहने वाले जय सिंह के भाई अजीत सिंह आए और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तत्काल मौके से हरमीत को चाकू के गिरफ्तार कर लिया था।

पुलिस ने तीन माह बाद हरजीत के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। कुछ समय बाद मुकदमे का ट्रायल सेशन कोर्ट में शुरू हुआ। इस मुकदमे में वादी की ओर से अधिवक्ता बीडी झा भी शामिल रहे। मुकदमे में कुल 21 गवाहों की गवाही हुई। इन्हीं के आधार पर हरमीत सिंह को आईपीसी की धारा 302(हत्या), धारा 307(हत्या का प्रयास) और 316 (गर्भस्थ शिशु की हत्या करना) में दोषी ठहराया गया था।

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