
“डाक्टर अनिल आर्य”(जन्मदिन पर विशेष)
हाल के दिनों में लोगों पर कुत्ते के हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं। गाजियाबाद में पार्क में खेल रहे एक बच्चे पर पिटबुल ने इस तरह हमला किया कि उसे 150 के करीब टांके लगाने पड़े। हाल में दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में एक पालतू कुत्ते के भौंकने को लेकर हुए झगड़े में पड़ोसी ने लोहे के पाइप से कथित तौर पर हमला कर तीन लोगों को घायल कर दिया। धर्मवीर दहिया नामक सड़क पर टहल रहा था तभी एक पालतू कुत्ता उस पर भौंकने लगा। अचानक दहिया ने कुत्ते की पूंछ पकड़ कर उसे दूर फेंक दिया। इसके बाद कुत्ते ने उसे काट दिया। इसके बाद उसने लोहे की रॉड से कुत्ते को मारा।
लम्बे समय से कुत्ते के काटने का उपचार कर रहे वरिष्ठ डाक्टर, डाक्टर अनिल आर्य के अनुसार, ‘कुत्ते के काटने से सेप्टीसीमिया, रेबीज या यहां तक कि व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। यदि आप घाव की ठीक से देखभाल नहीं करते हैं और नियमित रूप से इंजेक्शन नहीं लेते हैं, तो ये चीजें होने की संभावना है।’ कुत्ते के काटने के बाद होने वाली जटिलताओं का उल्लेख करते हुए डॉ. शर्मा कहते हैं, ‘भारत में, सबसे बड़ी समस्या जागरूकता की कमी है। यही कारण है कि इतने सारे लोग रेबीज से मर जाते हैं। स्ट्रीट डॉग्स को टीका नहीं लगाया जाता है और इलाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टीके अच्छी स्थिति में नहीं हैं।’
करें ये काम
जब एक कुत्ता काटता है, तो ज्यादातर लोग इसे साफ नहीं करते हैं जिससे जटिलताएं बढ़ते जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक तेजी से ठीक होने के लिए इन बातों का पालन करना जरूरी है, जो इस प्रकार हैं-
जितना हो सके बहते पानी और साबुन से उस हिस्से को साफ करें जहां कुत्ते ने काटा।
तुरंत किसी चिकित्सकीय विशेषज्ञ की मदद लें।
धोने के बाद आप लिक्विड के रूप में बीटाडीन या एंटीसेप्टिक भी लगा सकते हैं।
जिस दिन कुत्ते ने काटा उस दिन, तीसरे दिन, सातवें दिन, चौदहवें दिन और फिर अट्ठाईसवें दिन, यानी कुल पांच एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन लगते हैं जो सरकारी अस्पतालों में निशुल्क मिलता है।
घाव पर पट्टी न बांधें। डॉक्टर को तय करने दें कि क्या करना है। केवल एक डॉक्टर की सलाह के बाद ही आगे कदम उठाने चाहिए।
उपचार की प्रक्रिया
विशेषज्ञ ये मानते हैं कि जिस जगह कुत्ते ने काटा है वह जगह भी मायने रखती है। अगर यह कंधे पर है, तो इलाज अलग है। यदि यह कंधों के नीचे है, तो उपचार की प्रक्रिया बदल जाती है। पालतू कुत्तों को आमतौर पर वैक्सीन लगी ही होती है जबकि स्ट्रीट डॉग वैक्सीनेटेड नहीं होते हैं इसलिए उनके काटने पर रेबीज़ होने का ख़तरा अधिक बना रहता है।

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