देहरादून। आज अदालतों में झूठे सच्चे मुकदमों के अम्बार और पुलिस की एकाउंटबिलटी न होने से न जाने कितने बेगुनाहों की जिन्दगी अदालतों के चक्कर काटते काटते खत्म हो रही है या फिर जेल में विचाराधीन कैदी के रूप में पड़े रह कर दसियों साल तक जीवन की बर्वादी झेल रहे है? कहीं कोई इस भयावह खेल खेलने वाली पुलिस व अभियोजन की एकाउंटबिलटी है?
क्या इसके बारे में कहीं किसी सरकार या जुडीशियरी ने कोई परवाह की, दिखाई तो नहीं पड़ रही है परिणाम स्वरूप भ्रष्टाचारी काकस मौके का भरपूर लाभ उठा कर वेखौफ अनुचित लाभ उठा रहा है! इस काकस में प्रजातंत्र के तीनों महत्वपूर्ण स्तम्भ व भोंपू मीडिया एवं ठेकेदार जन नेताओं का भी तथाकथित रूप से कहीं न कहीं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष एक चेन बनाकर गुल खिलाना सम्मिलित नजर आ रहा है जिसे वर्तमान में जन-जन की जुबाँ पर सुना जा सकता है! कोई कहता है जिसकी लाठी, भैंस उसी की और कोई कहता है गूंगी बहरी सरकार है और कोई तो न्यायपालिका की अनसुनी से निराश व नरवश होकर समरथ को नहीं दोष गुसाईं मानकर ऊपर वाले पर छोड़ बैठता है। वैसे भी तो न तो न्याय ही सस्ता और न ही सरकार तक पहुचना आसान?
सबका साथ, सबका विश्वास के स्लोगन को धूल चटाते छुटभैय्ये भाजपाई!
…जबकि एफआईआर तो इस तलवार व उसके साथियों के विरुद्ध दर्ज होनी चाहिए थी?
उदाहरण राजधानी दून का ही देखिए जहाँ जिसके विरुद्ध होनी चाहिए थी एफआईआर और कार्यवाही वहाँ उसे बचाने के लिए एक छोटे कार्यकर्ता व जनहित में राज्य सरकार की भूमि बचाने वाले को ही बिना पहिये के चक्रब्यूह में फँसा डाला गया।
उक्त मामला सहस्त्रधारा रोड की चर्चित और सर्वोच्च न्यायालय से प्रतिबंधित गोल्डन फारेस्ट व उसकी सहयोगी कम्पनियों की जमीन की है। जबकि उक्त तहसील सदर के ग्राम धनौला की जमीन के विरुद्ध सरकार द्वारा गठित एसआईटी (विशेष जाँच दल) हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट में देहरादून के सहायक महा निबंधक ( निबंधन) को तीन माह पूर्व ही 12 अप्रैल, 2024 ही एफआईआर दर्ज कराने व कार्यवाही हेतु निर्देशित किया जा चुका था।
वैसे.यहाँ यह तथ्य भी जनहित में उजागर करना है कि यह चुनिंदा लोगो का संगठित गिरोह गोल्डन फारेस्ट की अनेकों अनेक जमीनों की बहती गंगा में सुनियोजित षडयंत्र के तहत फर्जीवाड़ा करके भोले भाले लोंगो को ठगने में काफी समय से लगे हुए हैं । बताया तो यह भी जा रहा है कि इस संगठित गिरोह के सदस्यों पर कुछ आलाअफसरों सहित राजनैतिक नेताओं का संरक्षण बरकरार है जिससे भाजपा की छवि भी खासी.धूमिल हो रही है! भाजपा संगठंन में होने के कारण इनके आगे राजस्व विभाग सहित जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन भी अपने को बौना मान निष्क्रिय हो गया है


उत्तराखंड


More Stories
मुख्यमंत्री के अनुरोध पर प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यों की समय-सीमा विस्तार को मिली स्वीकृति
सर्वे ऑफ इंडिया मुख्यालय देहरादून से नही होगा स्थानांतरित, मुख्यमंत्री ने इस संबंध में केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री से किया था अनुरोध
हल्द्वानी में 21 मार्च को भव्य जनसभा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह होंगे मुख्य अतिथि, सीएम धामी ने कार्यक्रम स्थल का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं को लेकर दिए सख्त निर्देश