September 27, 2026

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राजधांनी के मुख्य बाजारों मे निकली मां जिनवाणी पालकी शोभा यात्रा,ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है पर्व,जैन समाज के लोगो ने बढ चढ कर किया प्रतिभाग।

श्रुत पंचमी के शुभ अवसर पर गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला से मां जिनवाणी पालकी शोभा यात्रा निकाली गई इसी क्रम में आचार्य श्री ने प्रातः 6:15 बजे श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा की जिसमें सभी जैन श्रद्धालुओं ने शहर के विभिन्न मार्गो से श्रद्धा पूर्वक भगवान की भक्ति करते हुए मां जिनवाणी को सुसज्जित कर गुणगान किया और वापस जैन धर्मशाला की ओर प्रस्थान किया तत्पश्चात धर्मशाला में विराजमान वैज्ञानिक संत पाठशाला संवर्धन आचार्य गुरुवर 108 निर्भय सागर जी महाराज द्वारा आशीर्वचन दिए गए उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि श्रुत पंचमी एक दिगंबर जैन पर्व है | यह प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार श्रुत पंचमी पर्व, ज्ञान की आराधना का महान पर्व है, जो जैन भाई-बंधुओं को वीतरागी संतों की वाणी सुनने, आराधना करने और प्रभावना बांटने का संदेश देता है। इस दिन मां जिनवाणी की पूजा अर्चना करते हैं।


भगवान महावीर केवल उपदेश देते थे और उनके प्रमुख शिष्य (गणधर) उसे सभी को समझाते थे, क्योंकि तब महावीर की वाणी को लिखने की परंपरा नहीं थी। उसे सुनकर ही स्मरण किया जाता था इसीलिए उसका नाम श्रुत था। जैन समाज में इस दिन का विशेष महत्व है। इसी दिन पहली बार जैन धर्म ग्रंथ लिखा गया था।

भगवान महावीर ने जो ज्ञान दिया, उसे श्रुत परंपरा के अंतर्गत अनेक आचार्यों ने जीवित रखा। गुजरात के गिरनार पर्वत की चन्द्र गुफा में धरसेनाचार्य ने पुष्पदंत एवं भूतबलि मुनियों को सैद्धांतिक देशना दी जिसे सुनने के बाद मुनियों ने एक ग्रंथ रचकर ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को प्रस्तुत किया।

उस ग्रंथ को ‘षटखंडागम’ के नाम से जाना जाता है। इस दिन से श्रुत परंपरा को लिपिबद्ध परंपरा के रूप में प्रारंभ किया गया था इसीलिए यह दिवस श्रुत पंचमी के नाम से जाना जाता है। इसका एक अन्य नाम ‘प्राकृत भाषा दिवस’ भी है।
इसी कड़ी मे आज मधु सचिन जैन जी के निवास विजय पार्क में 108 श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज ने अपना आशीर्वाद पूरे परिवार को दिया। इस अवसर पर स्थानीय सभी लोग और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सभी जैन संस्थाओं ने भाग लिया और शहर के सभी गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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