गोपेश्वर (चमोली)। चारधाम यात्रा के दौरान प्राकृतिक आपदा की घटना घटित होने पर त्वरित राहत एवं बचाव कार्यो को अमल में लाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग एवं उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वाधान में गुरूवार को चमोली जिले में मॉक अभ्यास किया गया। जिसमें बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग अवरूद्व होने, वाहन दुर्घटना, आग लगने की घटना और भगदड़ जैसी स्थिति से निपटने का मॉक अभ्यास किया गया।
जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम से गुरूवार को सुबह 10ः07 बजे भारी बारिश के कारण बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग बाजपुर में मलवा आने से सड़क बाधित होने की सूचना प्रसारित की गई। सूचना मिलने पर रिस्पांसिबल ऑफिसर विवेक प्रकाश और आईआरएस से जुड़े अधिकारी तत्काल कंट्रोल रूम पहुंचे। एनएचआईडीसीएल, जल संस्थान, पूर्ति विभाग, पुलिस, तहसील प्रशासन की टीम को घटना स्थल के लिए रवाना किया गया। ट्रैफिक को नंदप्रयाग-कोठियालसैंण मोटर मार्ग से डायवर्ट करते हुए एनएच खोलने का काम शुरू किया गया। प्रशासन की ओर से यात्रियों को सूक्ष्म जलपान एवं पेयजल की व्यवस्था की गई। करीब 40 मिनट में एनएचआईडीसीएल ने बाजपुर में मलवा हटाकर सड़क को यातायात के लिए सुचारू किया गया।
दूसरी घटना में सुबह 10.12 बजे गोपेश्वर स्थित प्रसार प्रशिक्षण केंद्र रोली ग्वाड के कार्यालय और हॉस्टल में आग लगने की सूचना प्रसारित की गई तथा भवन में करीब 20 लोगों के फंसे होने की सूचना दी गई। एसडीएम चमोली के नेतृत्व में अग्निशमन, पुलिस, मेडिकल, यूपीसीएल, लोनिवि एवं जल संस्थान विभाग के अधिकारियों टीम संसाधनों के साथ घटना स्थल के लिए रवाना की गई। घटना स्थल पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। प्रसार प्रशिक्षण केंद्र में चार व्यक्ति थे, जिन्हें सुरक्षित निकाला गया तथा हॉस्टल में घायल दो व्यक्तियों को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया। दमकल वाहन की मदद से भवन में लगी आग को बुझाया गया।
तीसरी घटना में सुबह 10.27 बजे बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर गौचर के समीप चटवापीपल के पास एक मिनी बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिरने से दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना प्रसारित की गई। जिसमें 20-25 लोगों के घायल बताए गए। एसडीएम कर्णप्रयाग के नेतृत्व में एसडीआरएफ, आईटीबीपी, डीडीआरएफ, मेडिकल, एंबुलेंस, पूर्ति विभाग के अधिकारियों की टीम घटना स्थल के लिए रवाना की गई। घटना स्थल पर पहुंचते ही टीम ने रेस्क्यू कार्य शुरू किए। गहरी खाई में गिरे वाहन में 14 लोग सवार दिखाए गए। जिसमें चार घायलों को पीएचसी गौचर भेजा गया। अन्य यात्रियों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।
चौथी घटना में सुबह 10.35 बजे गोविन्द घाट में नदी का जल स्तर बढ़ने की अफवाह से भगदड़ की सूचना प्रसारित की गई। सूचना मिलने पर तहसीलदार जोशीमठ की निगरानी में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, आईटीबीपी, बीआरओ, मेडिकल एवं नगर पंचायत के कार्मिकों की टीम घटना स्थल के लिए रवाना की गई। रेस्क्यू टीम ने भगदड़ में गिरे घायल लोगों का रेस्क्यू शुरू किया। पुलिस द्वारा पीए सिस्टम के माध्यम से शांति बनाए रखने और अफवाह पर ध्यान न देने की सूचना प्रसारित कर भीड़ को भरोसा में लिया। यात्रियों की सुविधा के लिए राहत शिविर, सहायता केंद्र और मेडिकल पोस्ट लगाकर राहत पहुंचाई गई। करीब 15 मिनट में हालात सामान्य हुए। भगदड में 12 घायल लोगों को पीएचसी भेजा गया।
मॉक अभ्यास के बाद रेस्क्यू टीमों के साथ डीब्रीफिंग करते हुए उनके अनुभव लिए गए। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील जनपद चमोली के लिए यह मॉक अभ्यास मददगार साबित होगा। मॉक अभ्यास के दौरान रिस्पांस टाइम काफी सही रहा। इस दौरान संसाधनों की मैपिंग करने, रिस्पांस टाइम को कम से कम करने तथा मॉक अभ्यास में परिलक्षित कमियों को दूर करने, रेस्क्यू पर जाने से पहले आवश्यक सुरक्षा उपकरणों को साथ रखने और सूचनाओं का सटीक तरीके से आदान-प्रदान करने पर जोर दिया गया। ताकि भविष्य में वास्तविक आपदा के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन को अधिक प्रभावी ढंग से चलाया जा सके। इस दौरान सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को किसी भी आपदा से निपटने के लिए हर समय फिजिकली और मेंटली तैयार रहने के लिए प्रेरित किया गया। मॉक अभ्यास के दौरान जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम में अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, एसीएमओ डॉ वीपी सिंह, सेकंड कमांडेंट धमेन्द्र कुमार, डीएसओ जसवंत कंडारी, डीडीएमओ एनके जोशी आदि मौजूद थे।
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