
श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट राजपुर द्वारा आयोजित 74 वे श्री रामलीला महोत्सव में चौथे दिन अयोध्या में राजा दशरथ (चरण सिंह) द्वारा कुमार राम (उपदेश) को अयोध्या के राज की घोषणा करने के साथ खुशियां मनाई जाने लगी द्वीप मालाएं सजाएं जानी लगी। इस घोषणा को सुनकर कैकेई (संगीत) की दासी मंथरा (रघुबीर)ने महारानी कैकेई (संगीत)को समझा कर अयोध्या के राजा दशरथ (चरण सिंह)से उनके पुत्र भरत को राज और राम को चौदह वर्ष का वनवास के दो वरदान मांगने का षड्यंत्र रच डाला, परिणाम स्वरूप कैकेई ने कोप भवन में जाकर रंग में भंग कर सारी खुशियों में रंग में भंग कर दिया। महारानी कैकेई के वचनों से दुखी राजा दशरथ को राम को वनवास का आदेश देना ही पड़ा। राम वनवास का आदेश सुनकर सीताजी (सीता) और लक्ष्मण (गणेश) ने भी राम के साथ ही वन जाने का निर्णय लिया। श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट के डायरेक्टर श्री शिवदत्त, चरण सिंह तथा योगेश अग्रवाल के प्रभावी निर्देशन में श्री राम वनवास की अति प्रभावी सुन्दर मार्मिक लीला का मंचन बेहतरीन कलाकारों द्वारा कर श्रृद्धालु दर्शकों के हृदय पर गहरा प्रभाव पडा*।

*श्री आदर्श रामलीला ट्रस्ट के संरक्षक जयभगवान साहू, प्रधान योगेश अग्रवाल, मंत्री अंजय गोयल,कोषाध्यक्ष नरेन्द्र अग्रवाल,श्रवण अग्रवाल,वेद साहू,उपमंत्री अशोक साहू, आडिटर ब्रह्मप्रकाश वेदवाल, संजय धीमान,डॉ विशाल अग्रवाल,मोहित अग्रवाल, निशांत गोयल आदि के सक्रिय सहयोग से वनवास लीला भारी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति में संपन्न हुई।*

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