
पुराने समय मे छींक आने पर माँ,दादी,और नानी बोलती थी *क्षत्रपति योग माया ,घटे रोग बढे काया * ये बात साठ के दशक मे पैदा हुये लोग अच्छी तरह से जानते होगे लेकिन कालांतर मे जैसै सम्बोधन से राम राम समाप्त होकर पश्चिमी सभ्यता का “हैलो” आ गया वेसे ही गॉड ब्लेस यू’ आ जाता है. ‘गॉड ब्लेस यू’ बोलने के पीछे लोगों के द्वारा अलग-अलग कारण बताए जाते हैं. किसी के अनुसार ‘गॉड ब्लेस यू’ बोलने से शरीर में बुरी आत्माओं का प्रवेश नहीं होगा तो वहीं कोई कहता है कि छींक आने पर दिल की धड़कन रुक जाती है. लेकिन ‘गॉड ब्लेस यू’ बोलने के पीछे असल कारण क्या है
गॉड ब्लेस यू” कहने के पीछे का इतिहास काफी पुराना है. ऐसा कहा जाता है कि रोम में एक बीमारी होने के दौरान ‘गॉड ब्लेड यू’ कहने की शुरुआत हुई थी. इस बीमारी का लक्षण खांसना और छींकना था जिसे ‘बूबोनिक प्लेग’ कहा गया. जब कोई व्यक्ति बूबोनिक प्लेग से ग्रसित होता था तो पोप ग्रेगरी द्वारा ऐसे व्यक्ति के छींकने पर ‘गॉड ब्लेस यू’ कहना शुरू किया गया और लोगों को भी ‘गॉड ब्लेस यू’ कहने के लिए बोला गया.
उनके अनुसार ‘गॉड ब्लेस यू’ कहने से पीड़ित व्यक्ति को मरने से बचाया जा सकता है. इसी तरह से ‘गॉड ब्लेस यू’ कहने का दौर जारी हुआ. इसके अलावा लोगों द्वारा यह कहा जाता है कि छींकने के समय इंसान के अंदर से बुरी आत्मा बाहर निकलती है. इस दौरान अगर ‘गॉड ब्लेस यू’ बोला जाए तो किसी और व्यक्ति के शरीर में बुरी आत्मा का प्रवेश नहीं होता है.
**क्या छींक आने पर रुक जाती हैं दिल की धड़कनें**
लोगों में यह गलत धारणा है कि छींकने पर व्यक्ति के दिल की धड़कन बंद हो जाती है इसलिए छींकने पर ‘गॉड ब्लेस यू’ बोलना चाहिए. छींक आना हमारे शरीर के लिए जरूरी है क्योंकि जब कभी भी कोई बाहरी कण शरीर में चला जाता है तो उस बाहरी कण को फेफड़े के द्वारा हवा के माध्यम से शरीर से बाहर निकाला जाता है. यह हवा नाक और मुँह के द्वारा ही बाहर निकलती है जिसे हम छींक कहते है. छींक आने के का दिल की धड़कन रुकने से कोई सम्बन्ध नहीं होता है.
साभार चन्द्र शेखर जोशी मुख्य सेवक माँ बगलामुखी

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