देहरादून: ‘रामायण’ एक ऐसा अमूल्य ग्रंथ, जिसमें नीतियों का अनमोल खजाना छिपा हुआ है। हिन्दू संस्कृति ना केवल रामायण को मानती है बल्कि रामायण की सीख को जीवन में भी उतारती है। ‘रामायण’ के पात्रों को दुनियावी तौर-तरीकों से जब देखते हैं तो अपने ही लौकिक स्वरूप की संरचना साफ-साफ दिखाई पड़ती है। श्रीराम को मर्यादा की प्रतिमूर्ति मानते हुए, उन्हें अपना आदर्श चरित्र समझते हैं।
वहीं श्रीमदभगवत गीता दुनिया के चंद ग्रंथों में से एक है जो आज भी सबसे ज्यादा पढ़े जाते हैं और जीवन पथ पर कर्मों और नियमों पर चलने की प्रेरणा देते हैं। गीता हिन्दुओं में सर्वोच्च माना जाता है।
वहीं विदेशियों के लिए आज भी यह शोध का विषय है। इसके 18 अध्यायों के करीब 700 श्लोकों में हर उस समस्या का समाधान मिल जाता है जो कभी न कभी हर इंसान के सामने खड़ी हो जाती है। माना जाता है कि, यदि हम इसके श्लोकों का अध्ययन रोज करें तो हम आने वाली हर समस्या का हल बगैर किसी मदद के निकाल सकते हैं।
इन्हीं धार्मिक ग्रन्थों का देवेंद्र प्रसाद चमोली ने गढ़वाली में अनुवाद किया है। उनका मानना है कि, इससे एक तो हमारी लोक भाषा को प्रोत्साहन मिलेगा और साथ ही इन ग्रन्थों की अच्छाइयों से समाज आदर्श व संस्कारित हो सकेगा।
बता दें कि, देवेन्द्र चमोली आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर गढ़वाली गीत संगीत की प्रस्तुतियां देते रहते हैं। उनकी गढ़वाली रामायण उत्तराखण्ड के प्रत्येक स्कूल के वाचनालयों मे है। अब उन्होंने गढ़वाली मे भगवद् गीता का लेखन किया।

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