ऊँ नमो नारायणाय:
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 18 अगस्त को रात 9:21 मिनट से शुरू होगी, जो 19 अगस्त की रात 11 बजे तक रहेगी। ऐसे में इस वर्ष जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बन पा रहा है। भगवान विष्णु औेर श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष संयोग, भरणी नक्षत्र रहेगा. भरणी नक्षत्र आकाश मंडल का दूसरा नक्षत्र है. इस नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह है.
राहुकाल दोपहर 2 बजकर 3 मिनट से दोपहर 3 बजकर 41 मिनट तक रहेगा.
इस दिन तिथि, वार, नक्षत्र और ग्रहों से मिलकर 8 शुभ योग बन रहे हैं। ज्योतिषियों के मुताबिक ऐसा 400 साल बाद हो रहा है। मौजूद ग्रंथों के मुताबिक ये भगवान कृष्ण का 5249वां जन्म पर्व है।
गृहस्थ जीवन वाले भगवान श्री कृष्ण जन्म से पूर्व व्रत रखते हैं। रात्रि 12 बजे कृष्ण जन्म के बाद व्रत का परायण करते हैं। संन्यासी कृष्ण जन्म के बाद उत्सव से रूप में जन्माष्टमी मनाते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिवस इस बार भी दो दिन मनाया जाएगा। आज रात्रि 9.22 के बाद अष्टमी आ जाएगी और 19 अगस्त को सुबह 11 बजे तक रहेगी। इसके चलते 18 अगस्त को ही व्रत रखा जाएगा। 19 को जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
जन्माष्टमी ध्रुव और वृद्धि योग में मनाई जाएगी। 18 अगस्त की रात में 8.42 बजे तक वृद्धि योग रहेगा। इसके बाद ध्रुव योग शुरू होगा जो 19 अगस्त को रात 8.59 बजे तक रहेगा। हिंदू धर्म में ये योग बेहद खास माने गए हैं।
19 अगस्त को महालक्ष्मी, बुधादित्य, ध्रुव और छत्र नाम के शुभ योग रहेंगे साथ ही कुलदीपक, भारती, हर्ष और सत्कीर्ति नाम के राजयोग बन रहे हैं। इस तरह जन्माष्टमी पर इन आठ योगों का महासंयोग पिछले 400 सालों में नहीं बना।
किसी मंदिर में ध्वज और छत्र तथा अन्य का दान भी करना चाहिए।
साभार, चन्द्र शेखर जोशी
मुख्य सेवक माँ बगलामुखी पीठ
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