रुद्रप्रयाग: कोरोना संकट के बीच उत्तराखंड पर्यटन की रीढ़ माने जाने वाली चारधाम यात्रा के कपाट खोलने की पूरी तैयारी हो चुकी है। वहीं लॉक डाउन के चलते अब तक सबसे बड़ा संयस कपाट खोलने के दौरान रावलों की मौजूदगी को लेकर बना था। लेकिन अब इस बीच चारधाम यात्रा के शुरू होने से पहले केदारनाथ धाम की कपाट पूजा के लिए रावल भीमाशंकर लिंग अपने सेवादारों के साथ उत्तराखंड पहुंच गए हैं।
रविवार को ऊखीमठ पहुंचने पर प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर उनका हाल जाना। इसके साथ ही रावल समेत अन्य सभी पांच सेवादारों को होम क्वारंटीन कर दिया है। लॉकडाउन के चलते केदारनाथ धाम के रावल महाराष्ट्र में फंसे हुए थे, जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें उत्तराखंड आने की इजाजत दी। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र के नांदेड़ फंसे रावल ने ऊखीमठ जाने की अनुमति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा था।
वहीं बदरीनाथ के रावल केरल में फंसने के चलते उत्तराखंड शासन ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर रावल को उत्तराखंड पहुंचाने का आग्रह किया।
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बता दें कि केदारनाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल को खुलने हैं। इससे पहले रावल के धाम पहुंचने को लेकर संयस बना हुआ था। वहीं रावल के उत्तराखंड के लिए रवाना होने पर शुक्रवार को प्रदेश सरकार को कुछ हद तक राहत मिली। कपाट खुलने के समय होनी वाली मुख्य पूजा रावल ही कराते हैं। इस बीच रावलों के न रहने पर प्रदेश सरकार द्वारा ऑनलाइन पूजा पर भी विचार हुआ, लेकिन इसका जमकर विरोध हुआ।
26 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम यात्रा की शुरुआत होगी। 30 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने हैं।
वहीं इससे पहले कोरोना संक्रमण के कारण गढ़वाल मंडल विकास निगम को चारधाम यात्रा के लिए मिली बुकिंग में एक करोड़ 25 लाख की बुकिंग अभी तक रद्द हो चुकी है। ऐसे में लॉक डाउन और कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच यात्रा धीमी रहने का अनुमान है।

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