इलाहाबाद हाई कोर्ट ने धर्मांतरण के मामले में 37 आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। याचियों पर एक शख्स को लालच देकर हिंदू धर्म से ईसाई बनने के लिए मजबूर करने का आरोप है। यह रिट याचिका जोस प्रकाश जॉर्ज और 36 अन्य लोगों द्वारा दायर की गई थी। इसमें उन पर दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी।
याचियों के खिलाफ 23 जनवरी, 2023 को फतेहपुर जिले के कोतवाली थाने में आईपीसी की धाराओं 420, 467, 468, 506, 120-बी और गैर कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध कानून की धारा 3/5 (1) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि लगभग समान आरोपों पर एक ही अधिनियम के तहत 15 अप्रैल, 2022 को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उस प्राथमिकी में भी आईपीसी की धाराओं 153ए, 420, 467, 468 और 506 और गैर कानूनी धर्म परिवर्तन निषेध कानून की धारा 3/5 (1) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
मौजूदा मामले में शिकायतकर्ता उन गवाहों में से एक है, जिसका बयान 15 अप्रैल, 2022 को लिखी गई प्राथमिकी में सीआरपीसी की धारा 161 के तहत पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अपनी दलील में कहा कि दोनों ही प्राथमिकियों में एक या दो व्यक्तियों को छोड़कर आरोपी समान ही हैं और दोनों मामलों में शिकायतकर्ता अलग-अलग हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ही मामलों में धोखाधड़ी और लालच देकर सामूहिक धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया गया है, इन तथ्यों को देखते हुए उक्त प्राथमिकी सीआरपीसी की धारा 154 और 158 के तहत वर्जित है।
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