July 23, 2026

rashtriyadiyasamachar

एक राष्ट्र, एक विधान, एक नजर,एक खबर

उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव’

देहरादून
उत्तराखण्ड सरकार, राज्य में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड संस्कृत आयोग के गठन की तैयारी कर रही है। आयोग के गठन को व्यापक और प्रभावी बनाने के लिए देशभर के संस्कृत विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों, विश्वविद्यालयों, गुरुकुलों, संस्कृत संस्थानों तथा संस्कृत प्रेमियों से सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं। इच्छुक व्यक्ति और संस्थान 10 अगस्त 2026 तक ई-मेल के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं।

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखण्ड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा का दर्जा देकर देश में नई पहल की थी। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में संस्कृत के संरक्षण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उच्चस्तरीय संस्कृत आयोग बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। इसी के बाद 15 जुलाई 2026 को सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में आयोग के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

प्रस्तावित आयोग संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, संस्कृत आधारित कौशल विकास और रोजगार, प्रशासन तथा तकनीकी क्षेत्रों में संस्कृत के उपयोग के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल माध्यमों में संस्कृत की संभावनाओं पर भी कार्य करेगा। आयोग संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए दीर्घकालिक नीतियां और कार्ययोजनाएं तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

’देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से है, जिसमें संस्कृत का विशेष स्थान है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। राज्य सरकार इसे जन-जन तक पहुंचाने और समय के अनुरूप नई पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।’
’पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री’

You may have missed

Share