
हल्द्वनी रेलवे जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दे दिया है और अब इस मामले की सुनवाई के लिए 7 फरवरी का दिन निर्धारित किया है लेकिन सनातन शक्ति उत्तराखंड द्वारा हल्द्वानी रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से बसे लोगो की नागरिकता पर ही सवाल उठा दिया और इस जमीन पर बसे लोगो के इतिहास को खंगालने की विनती राज्य सरकार से कि है “राष्ट्रीय दिया समाचार ” को सनातन शक्ति संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष अभय सोलंकी ने प्रेस विज्ञप्त भेज कर बताया कि हल्द्वानी(उत्तराखण्ड) में 1951,1961,1971 के जनसंख्या सर्वे(सेन्सस) में एक भी मुसलमान परिवार/वोटर नहीं था तो 70-80 साल से रहने की बात कहना और उस ज़मीन कागज़ का होना कैसे सम्भव हुआ होगा?
यह यक्ष प्रश्न 7 फरवरी 2023 की सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली पेशी में जरुर उठेगा, तब तक हाई कोर्ट के निर्णय पर रोक रहेगी।
प्रदेश उपाध्यक्ष अभय सोलंकी ने मुखर होकर कहा
रेलवे ने हेक्टेयर का उल्लेख किया है जो एकड़ में 79 एकड़ होती है, जबकि राजनीतिक दल भ्रम फैला रहे हैं।
मानवीय दृष्टिकोण भी अपनी जगह है लेकिन इस तर्क अनुसार समूचे देश में सैकड़ों हेक्टेयर पर अतिक्रमण है जो शासन प्रशासन की मिली भगत से वोटों की खातिर ही हुआ है वह भी मानवीय तर्क अनुसार वैध हो जायेगा ?
सनातन शक्ति के प्रदेश उपाध्यक्ष अभय सोलंकी ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा
अतिक्रमण वाली ज़मीन पर रहने वालों की समूची गहन जांच होनी चाहिये कि ये अमुक रहने वाले असल में भारतीय नागरिक हैं या नहीं।
इस देश में कई घोटाले हुए हैं और तथाकथित अतिक्रमण भी एक घोटाला ही है। उत्तराखंड की संस्कृति एवं उत्तराखंड मे आवेद अतिक्रमणकारियों के सामने चट्टान बंकर सनातन शक्ति संगठन खड़ा है देश हित और राज्य हित मे संगठन के सदस्य कीसी भी चुनौति को स्वीकार करने मे पीछे नही हटेगा।

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