
विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में एम्स ऋषिकेश में काॅम्युनिटी मेडिसिन विभाग के तत्वावधान में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। दो दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन पब्लिक हेल्थ से संबन्धित विभिन्न कार्यशालाओं के आयोजन के साथ ही ग्रुप डिस्कसन के विभिन्न सत्र भी आयोजित हुए।
मंगलवार को कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने एम्स ऋषिकेश को वन हेल्थ के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहरायी। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा किया जा रहा साक्ष्य-आधारित अनुसंधान न केवल क्षेत्रीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य दिवस पर इस वर्ष की थीम “टूगेदर फाॅर हेल्थ” की अवधारणा को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि चिकित्सा, पशु चिकित्सा एवं पर्यावरण विज्ञान आदि विभिन्न क्षेत्रों के समन्वित प्रयासों से ही समग्र स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंस दिल्ली की प्रो. डॉ. सुनीला गर्ग ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज) को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध 12 सेवा पैकेजों की भूमिका को विस्तार से समझाया और रेखांकित किया कि सामुदायिक भागीदारी एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से ही स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच एवं गुणवत्ता में सुधार संभव है। कार्यक्रम को संस्थान के डीन एकेडमिक प्रो. सौरभ वाष्र्णेय और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. बी. सत्या श्री ने भी संबोधित किया। उन्होंने वन हेल्थ की अवधारणा, समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण एवं वर्तमान स्वास्थ्य चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे प्रयास स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाते हैं।
काॅम्युनिटी मेडिसिन की विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सैना ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और कहा कि मानव, पशु एवं पर्यावरणीय स्वास्थ्य के एकीकृत दृष्टिकोण को सुदृढ़ करना और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जनस्वास्थ्य रणनीतियों को बढ़ावा देना विश्व स्वास्थ्य दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि विभाग वयस्क टीकाकरण (एडल्ट वैक्सीनेशन) को बढ़ावा देने हेतु व्यापक अनुसंधान एवं जनजागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।
पब्लिक हेल्थ एक्टिविटीज कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा जनस्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं, रोग निगरानी, टीकाकरण, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (ए.एम.आर), स्वच्छता, एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, केस स्टडी आधारित शिक्षण एवं समूह गतिविधियों के माध्यम से समकालीन जनस्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के उपायों से अवगत कराया गया।
इस दौरान डीन रिसर्च प्रो. शैलन्द्र हांडू, डीडीए ले. कर्नल गोपाल मेहरा, नेत्र रोग विभाग के हेड प्रो. संजीव मित्तल, मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. रविकांत, डॉ. सुरेखा किशोर, डॉ. रंजीता कुमारी, डॉ. प्रदीप अग्रवाल, डॉ. स्मिता सिन्हा, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. मीनाक्षी खापरे, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. अजीत भदौरिया, डाॅ. बेला गोयल, डाॅ. पूजा भदौरिया, डॉ. बसव राज, डॉ. गर्गी, डॉ. अश्वनी सेठ, डॉ. जोएन, डॉ. अनुभूति एवं डॉ. मालविका सहित एमडी एवं एमपीएच के स्टूडेन्ट्स मौजूद रहे।

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