
राजेन्द्र शिवाली (राष्ट्रीय दिया समाचार) कोटद्वार
कोटद्वार नगर निगम व विद्युत विभाग की लापरवाही ने ले ली बेजुबान सांड की जान
कोटद्वार। बीती देर शाम यहां गाड़ीघाट तिराहे पर नगर निगम द्वारा बनाए गए कुंडा घर में विद्युत पोल पर आए करंट की चपेट में आने से एक बेजुबान सांड की जान चली गई। इस मामले में नगर निगम की घोर लापरवाही सामने आई है गौरतलब है कि यह कूड़ा घर केवल सफाई कर्मियों द्वारा सड़क का कूड़ा डालने के लिए बनाया गया है, क्यों कि घरों का कूडा डालने के लिए नगर निगम की गाड़ी प्रजापति नगर समेत पूरे गाड़ीघाट में कूड़ा लेने जातीं हैं, लेकिन प्रजापति नगर और गाड़ी घाट के कुछ बेशर्म और अनपढ़, गंवार लोग घरों का कूड़ा गाड़ी में न डालकर कूड़ा घर के बाहर सड़क पर ही फेंक कर चले जाते हैं, जिसे खाने के लिए आवारा बेजुबान जानवरो का कूड़ा घर के बाहर तांता लगा रहता है। कूड़ा घर का गेट एक माह पूर्व सांडों की लड़ाई में टूट चुका है। क्षेत्रीय पार्षद को भी बता दियारा गया था, किन्तु न तो नगर निगम की मेयर और न ही नगर आयुक्त के कानों पर जूं रेंगी है। अंधेर नगरी चौपट राजा वाली स्थिति है। पूरा नगर निगम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। लाखों के घोटाले हो चुके हैं। सबसे मजेदार बात सह है, जब नगर निगम कूड़ा उठाने के लिए घर घर वाहन भेज रहा है, तो वह सड़क पर कूड़ा फेंकने वालों के चालान न कर कौन सी रिश्तेदारों निभा रहा है। क्षेत्र के लोगों द्वारा यहां सड़क पर कूड़ा न फेंकने की चेतावनी और कुंडा फेंकने पर जुर्माना का बोर्ड लगाने की बात क्षेत्रीय पार्षद की की गई और उन्होंने मेयर से कहा तो मेयर ने बचकाना जवाब देकर पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा वहां बोर्ड नहीं लग सकता। क्यों कि वहां कूड़ा घर बना है। अब उन्हें कैसे समझाएं कि जब कूड़ा घर बना है तो लोग सड़क पर कूड़ा क्यों फेंक रहे हैं, उनके चालान क्यों नहीं किए जाते हैं। फिर घर घर कूड़ा गाड़ी भेजने का औचित्य क्या है। आज तक नगर निगम ने सड़क पर कूडा फेंकने वालों के कितने चालान किए है इसका कोई ठोस जवाब आज तक देने मे असमर्थ रहे है।

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