
आज दिनाँक 26 अगस्त को मन्दिर श्री राधा कृष्ण मान्नूगंज द्वारा आयोजित श्री भक्तमाल कथा का 5वा और अंतिम दिन समाप्त हुआ जिसमे श्री वृंदावन धाम के रसिक संत बाबा चित्र विचित्र जी महाराज जी ने श्री कृष्ण प्रेम व भक्तो की कथा मे श्री हरिदास जी चरित्र व बिहारी जी का प्रकट उत्सव मनाया गया आपको बता दे कि आज पंचम दिवस श्री भक्तमाल कथा का आज स्वामी श्री हरिदास जी का चरित्र व उनके लाडले ठाकुर श्री बांके बाहरी जी का प्रकट उत्सव मनाया गया, स्वामी हरिदास जी की यह परंपरा लगभग 543 वर्षों पुराना है। जिनमें श्री स्वामी हरिदास जी महाराज ने श्रीधाम वृन्दावन में भगवान बांकेबिहारी जी को प्रकट किया था। स्वामी श्याम चरण दास जी इन्हीं की परंपरा के 18 वीं पीढ़ी के महंत श्री राधा चरण दास जी महाराज, टाटिया स्थान श्रीधाम वृन्दावन के परम कृपापात्र शिष्य थे।

कथा सुनकर सभी श्रोता गण आनंदमय हो गये कथा मे महाराज ने बताया कि जब बिहरी जी का प्रकट हुआ था तो रोजाना 12 स्वर्ण मुद्राएँ मंदिर से प्रकट होती थी जिनसे वहा रहने वाले रसिको जीव जन्तुओ का पालन पोषण होता है,उन्होने आज कल के संतो पर भी व्यंग कसते हुए कहा कि आजकल संतो की परिभाषा ही बदल गई है उनहोने कहा कि आज के युग मे साधु बनना बहुत आसान है करना क्या है बस मुंड मुडवा लो साधु बन गये लेकिन संत बनना बहुत मुश्किल है कहते है कि सर मुण्डवाने के भी तीन फायदे है ,मूंड मुंडाये तीन सुख मिले मिटे सर की ,खाने को मेवा मिले और लोग कहे महाराज,

भक्तमाल कथा में भगवान् के प्रति भक्तों का समर्पण और उनकी दिव्य भक्ति का दर्शन है . समिति से मंदिर के पुजारी मनीष शर्मा, मुकेश शर्मा, अर्पित बग्गा, गौरव वाधवा, रजत सभरवाल, गुरदीप सिंह, ऋषभ अग्रवाल, उमेश मिनोचा जी आदि थे.

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