
तराई पूर्वी वन डिवीजन के डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि बीती 22 जुलाई को पुलिस एसटीएफ, वन विभाग और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल की टीम ने खटीमा में टोल प्लाजा के पास से बोलेरो से जा रहे 4 वन्यजीव तस्कर कृष्ण कुमार, गजेंद्र सिंह, हरीश कुमार, संजय कुमार सभी निवासी धारचूला, पिथौरागढ़ को गिरफ्तार किया था। इनसे टाइगर की खाल और 10.4 किग्रा हड्डियां मिली थीं। उनकी निशानदेही पर 23 जुलाई को ऊधम सिंह नगर के ही काशीपुर से अर्जुन सिंह उर्फ कौआ निवासी प्रगति विहार, देहरादून को पकड़ा था। यह शिकारी भी है हालांकि इस प्रकरण में तस्करों का सरगना बताया जा रहा है। फिर उसकी निशानदेही पर वन गूर्जर ‘मांगे’ उर्फ इमाम निवासी चिड़ियापुर हरिद्वार को दबोचा। इमाम से पूछताछ के बाद वन गूर्जर शमसाद अली उर्फ बाबू निवासी बिजनौर को हिरासत में लिया तो बाघ के शिकार का चिट्ठा खुल गया। जांच में सामने आया कि इन्होंने दो-तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर टाइगर को मारा था। वन विभाग बाकी अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जुट गया है। हालांकि बाघ को कब, कैसे और कहां मारा इसकी गुत्थी अभी तक नहीं सुलझ पाई है। वन विभाग ने दोनों आरोपियों को खटीमा में एसीजेएम कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। वन विभाग उन्हें रिमांड पर लेने की कोशिश कर रहा है।

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