
सुनील सोनकर (राष्ट्रीय दिया समाचार ) मसूरी
पहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के बाद जनजीवन को पटरी पर लाने के लिए जिला प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं। हालिया आपदा के दौरान बंद हुए मुख्य और संपर्क मार्गों को प्रशासन ने युद्धस्तर पर अभियान चलाकर 24 घंटे के भीतर सुचारु करा दिया। अब प्रशासन का अगला लक्ष्य शहर की जर्जर और गड्ढों से भरी सड़कों को सुरक्षित बनाना है।
एसडीएम मसूरी राहुल आनंद ने लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग और नगर पालिका के अधिकारियों की बैठक लेकर निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने-अपने अधिकार क्षेत्र की सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त करें। फिलहाल बरसात को देखते हुए अस्थायी मरम्मत कर गड्ढों को भरा जाएगा, जबकि बारिश समाप्त होने के बाद स्थायी पुनर्निर्माण कराया जाएगा। राहुल आनंद ने बताया कि हाल की भारी बारिश के दौरान मसूरी-देहरादून मार्ग सहित कई संपर्क मार्गों पर भारी भूस्खलन हुआ था। जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर यातायात को 12 से 24 घंटे के भीतर बहाल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसी भी आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। एसडीएम ने कहा कि जांच में सामने आया है कि कुछ स्थानों पर निर्माण कार्यों का मलबा सड़क किनारे और ढलानों पर डाला जा रहा है, जो बारिश में बहकर मुख्य मार्गों पर पहुंच रहा है और बार-बार सड़क बंद होने का कारण बन रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को संयुक्त रूप से ऐसे लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने निर्माण विभाग की बैठक लेकर पालिका क्षेत्र की सभी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के निर्देश दिए हैं। फिलहाल गड्ढों को भरने का कार्य शुरू किया जाएगा और मानसून समाप्त होने के बाद सड़कों का स्थायी पुनर्निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि सड़क किनारे मलबा फेंकने वालों की पहचान के लिए एक समिति गठित की गई है। कई लोगों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। यदि सात दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
नगर पालिका सभासद जसबीर कौर ने कहा कि मसूरी में आज तक अधिकृत डंपिंग जोन का निर्धारण नहीं हो सका है, जिसके कारण निर्माण एजेंसियां और ठेकेदार मलबा सड़क किनारे, नालों और जंगलों में फेंक रहे हैं। उन्होंने मांग की कि नगर क्षेत्र में जल्द से जल्द वैज्ञानिक डंपिंग जोन चिन्हित किया जाए और सभी निर्माण कार्यों का मलबा वहीं डालना अनिवार्य किया जाए। इसके बाद भी यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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