March 4, 2026

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आरटीआई में बड़ा खुलासा: हरिद्वार जल संस्थान और पेयजल समिति की मिलीभगत से करोड़ों का घोटाला, सुभाष नगरवासी बने शिकार !

राजीव शास्त्री (राष्ट्रीय दिया समाचार ) हरिद्वार

आरटीआई के माध्यम से सामने आए चौंकाने वाले खुलासे ने उत्तराखंड जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार जल संस्थान हरिद्वार द्वारा सुभाष नगर क्षेत्र में पेयजल समिति द्वारा मनमाने तरीके से तय किए गए जल शुल्क को सीधे सरकारी बिलों में जोड़कर वसूला जा रहा है। इससे न केवल स्थानीय लोग आर्थिक रूप से परेशान हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की उदासीनता ने इस मामले को और अधिक संदेहास्पद बना दिया है।

सुभाष नगर की पेयजल समिति 12 अगस्त 2014 को प्रशासक के अधीन हो गई थी। जिसके बावजूद भी पेयजल समिति के तीन व्यक्तियो ने जल संस्थान अवैध तरीके से पानी की टंकी को चलाते रहे और जनता से मनमर्जी से जल शुल्क वसूलते रहे, तंग आकर पेयजल समिति के खिलाफ यहां की जनता ने जिला उभोक्ताफोरम व राज्य उपभोक्ता फोरम देहरादून तक केस लड़ा दोनों ने जनता के हितों को देखते हुए जनताहित में निर्णय दिया। चलते हुए केस के दौरान समिति ने मनमानी ढंग से बिना किसी की अनुमति से जल शुल्क 60 रूपए से बढाकर 200 रूपए कर दिया । जनता ने इस मामले की जानकारी जिला अधिकारी को की ,जिसे अपने संज्ञान मे लेते हुए जिला अधिकरी ने जांच के आदेश दिए।जानकारी के अनुसार न्यू सुभाष नगर में दो जल पंप लगे हुए हैं, जिसमें एक पंप पेयजल समिति के नाम और दूसरा जल संस्थान उत्तराखंड के नाम पर है ,दोनों का पानी समिति द्वारा पूरे सुभाष नगर में सप्लाई किया जाता था । समिति सर्फ अपने जल पंप का ही बिजली का बिल जमा करती रही और जल संस्थान के जल पंप का बिजली के बिलों को आज तक नहीं जमा किया गया, जिस कारण वह आज 4 करोड़ तक पहुंच गया।स्थानीय निवासी राजेश वर्मा ने बताया कि इस पूरे भ्रष्टाचार की जड़ पेय जल समिति है समिति के सदस्यों के विरुद्ध जांच की जानी चाहिए।किरण सिंह ने बताया कि जल शुल्क बढ़ाने से पूर्व पेय जल समिति को स्थानीय निवासियों को जानकारी दी जानी चाहिए थी।समिति ने बिना किसी अनुमति के जल शुल्क बढ़ा कर उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ाया है।ओमपाल सिंह का कहना है कि प्रशासन को शीघ्र ही इस मामले का संज्ञान लेते हुए दोषियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही करते हुए जनता के हितों का ध्यान रखना चाहिए।

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