नैनीताल
उत्तराखंड सरकार के एक आदेश पर नैनीताल हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। विधानसभा सचिवालय के 100 से अधिक कर्मचारियों की बर्खास्तगी का जो आदेश सरकार द्वारा जारी किया गया था। उसपर अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है।
बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने पूर्व प्रमुख डीके कोटिया की अध्यक्षता में बनाई समिति की सिफारिशों के आधार पर कर्मचारियों की बर्खास्तगी का फैसला लिया था। गौरतलब है कि यह सभी तदर्थ कर्मचारी हैं। ऐसे में इस निर्णय पर भी प्रदेश भर में चर्चा हुई थी।
मगर बीते दिन उत्तराखंड सरकार को झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सरकार को झटका दिया है। दरअसल, न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने कर्मचारियों को सुनवाई का मौका नहीं देने पर नाराजगी व्यक्त की थी। साथ ही विधानसभा से इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।
आपको बता दें कि अपनी बर्खास्तगी के आदेश को बबिता भंडारी, भूपेंद्र सिंह बिष्ट व कुलदीप सिंह अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवीदत्त कामत, वरिष्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत व रविन्द्र सिंह बिष्ट ने कोर्ट को अवगत कराया कि विधान सभा अध्यक्ष के द्वारा लोकहित को देखते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी है।
उत्तराखंड विधानसभा बैकडोर भर्ती मामले की सुनवाई करते हुए विधान सभा सचिवालय के दिनांक 27, 28 व 29 सितंबर के बर्खास्तगी आदेश पर नैनीताल हाईकोर्ट ने अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है. साथ ही कोर्ट ने इस मामले में विधान सभा सचिवालय से चार सप्ताह के जवाब पेश करने को कहा है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि ये कर्मचारी अपने पदों पर कार्य करते रहेंगे. अगर सचिवालय चाहे तो रेगुलर नियुक्ति की प्रक्रिया चालू कर सकती है. ऐसे में अब इस मामले कि अगली सुनवाई 19 दिसंबर नियत की गई है।

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