अल्मोड़ा। जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था बदहाल है। अस्पतालों में डॉक्टरों के 13 पद खाली चल रहे हैं। इससे मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार मरीजों को बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ता है।
जिले में कुल 50 सरकारी आयुर्वेदिक अस्पताल हैं और डॉक्टरों के 50 पद सृजित हैं लेकिन इनमें से 13 पद खाली चल रहे हैं। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सल्पड़, जागेश्वर, बसंतपुर, क्वैरला, मानुली, आमधार, पीपना, सैंणामानुर, चित्तौड़खाल, नाली, नगचूलाखाल, सैल और टाना के अस्पताल में डॉक्टर नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों की कमी होने की वजह से उपचार कराने आने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन अस्पतालों में फार्मासिस्ट ही मरीजों को देख रहे हैं। फार्मासिस्ट के अवकाश पर जाने से मरीजों को दिक्कतों इलाज भी नहीं मिल पाता है। मरीज आयुर्वेदिक चिकित्सा का लाभ उठाने के लिए दूसरे अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इससे उनका समय और धन दोनों बर्बाद होता है।
आयुर्वेदिक अस्पताल शीतलाखेत में नहीं है फार्मासिस्ट
अल्मोड़ा। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल शीतलाखेत में चिकित्सक अवकाश पर हैं। इस अस्पताल में फार्मासिस्ट का पद रिक्त है। डॉक्टर और फार्मासिस्ट न होने से मरीजों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। अस्पताल में सप्ताह में दो दिन दूसरे अस्पताल से डॉक्टर भेजा जा रहा है। इससे मरीजों को थोड़ी राहत मिल रही है।

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