उत्तराखंड विधानसभा ने बुधवार को सख्त प्रावधानों वाला धर्मांतरण रोधी संशोधन विधेयक पारित कर दिया था, जिसमें इसे गैर-जमानती अपराध माना गया है. इसके तहत जबरन धर्म परिवर्तन के दोषियों के लिए तीन साल से लेकर 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा कम से कम 50 हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है. वहीं इस संशोधन के बाद अपराध करने वाले को कम से कम 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान भी करना भी पड़ सकता है जो पीड़ित को दी जाएगी.इस धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक-2022 को ध्वनि मत से पारित होने के बाद हिन्दू संत समाज मै हर्ष की लहर दौड गई है जिसके बाद कई अखाडे ने उत्तराखण्ड के मुखयमंत्री का आभार जताया और इस कानून बनने के बाद हिन्द समाज के उपर छाये काले बादलो के हटने की संभावनाए व्यक्त की देखिये क्या कह रहे है धर्माधिकारी।
धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को इस विधेयक को पेश किया था. बिल पेश करते हुए कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 27 और 28 के अनुसार हर धर्म को समान रूप से प्रबल करने के उद्देश्य में आ रही दिक्कतों से निपटने के लिए संशोधन विधेयक लाया गया है. पहले राज्य में अवैध धर्मांतरण के लिए जुर्माना लगाने के अलावा एक से सात साल तक की सजा का प्रावधान था. विधेयक के अनुसार, ‘कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बल, प्रलोभन या कपटपूर्ण साधन द्वारा एक धर्म से दूसरे में परिवर्तित या परिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा. कोई व्यक्ति ऐसे धर्म परिवर्तन के लिए उत्प्रेरित या षड्यंत्र नहीं करेगा.’

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