August 30, 2025

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भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के दिन को बताया जीवन का सबसे सुनहरा दिन,500 वर्ष के संघर्ष के बाद यह दिव्य,भव्य और आलोकित पल आ रहा है,22 जनवरी को विशाल उत्सव मनाए: डा.नरेश बंसल राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष भाजपा एवं सासंद राज्य सभा

सांसद राज्यसभा व राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष भाजपा डा.नरेश बंसल ने 22 जनवरी को श्री अयोध्या धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर हर्ष जताया है व सभी देशवासियों को हार्दिक बधाईऔर शुभकामनाए दी है । डा. नरेश बंसल ने कहा कि भारत के इतिहास में 22 जनवरी 2024 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। ये पल सभी के लिए बहुत ही खास और ऐतिहासिक होने वाला है। सभी रामभक्त इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनेंगे। डा. नरेश बंसल ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या में 70 एकड़ भूमि पर बने भव्य राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को होनी है। इस तारीख का सभी को बेसब्री से इंतजार था। लगातार भक्तों में मंदिर के उद्घाटन की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। साथ ही अयोध्या के अलावा भी पूरे देश के कोने-कोने में हर्षोल्लास देखने को मिल रहा है। इस भव्य कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम दौर में है। रामलला की मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित करने का समय सबसे अहम होगा।
डा. नरेश बंसल ने कहा कि 500 वर्ष के संघर्ष के बाद यह दिव्य,भव्य और आलोकित पल आ रहा है ,बंसल ने राम मंदिर आंदोलन की यादें ताजा करते हुए बताया कि वह संघर्ष का दौर था। तुष्टीकरण की राजनीती करने वाली सरकारें सत्ता में थी व सनातन धर्म के साथ मंदिर आन्दोलन को कुचलने का प्रयास पूरे जोर पर था उस समय सरकार की दमनकारी नीति से समस्त रामभक्त को कुचलने का काम किया जा रहा था। देहरादून में भी यही माहोल था पर राम भक्त भी लोहा लेने को तैयार थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिन्दू परिषद आदि संगठन के कार्यकर्ता इस मुहिम मे लगे थे ।डा. नरेश बंसल ने बताया कि उनके पास श्री राम शिला पूजन हेतू देहरादून संयोजक का दायित्व था ।देहरादून के घंटाघर से शिला पूजन यात्रा निकलनी थी तत्कालीन डीएम ,एस एस पी ने अनुमति नहीं दी व यात्रा रोकने की पूरी कोशिश की। इस पर श्री देवेंद्र शात्री जी व अन्य लोग कंधे पर ही मूर्ति व शिला लेकर चल पड़े व साथ में पूरा देहरादून चल पड़ा।
डा. नरेश बंसल ने कहा कि संगठन की ओर से गिरफ्तार न होते हुए कार्य आगे बढ़ाने के निर्देश थे। उनकी टोली भेष बदलकर घुमती थी व घर से बाहर रहते थे। दीवार लेखन,साहित्य वितरण, टोली बनाकर कार्यक्रम कराना यह कार्य था ।डा.नरेश बंसल ने कहा कि यह हर्ष का विषय है अपने जीवनकाल मे यह पावन अवसर देखने का अवसर मिल रहा है ।डा.नरेश बंसल ने सभी से आवाह्न किया कि 22 को विशाल उत्सव मनाए।

 

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