March 3, 2026

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उत्तराखंड के लिए आंदोलन करने वालो का फूटा गुस्सा, शहादत दीं मसूरी ने और सम्मान कही और मिलने का लगाया आरोप,

सुनील सोनकर (राष्ट्रीय दिया समाचार) मसूरी

राज्य निर्माण की रजत जयंती पर जहां पूरा उत्तराखंड जश्न मना रहा है, वहीं मसूरी में वह धरती सिसक रही है जिसने राज्य आंदोलन के दौरान अपने लालों को खोया था। शुक्रवार को मसूरी शहीद स्थल पर जुटे आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कृ “मसूरी ने रक्त दिया, बलिदान दिया, मगर सम्मान किसी और को दिया जा रहा है। यह हमारे शहीदों की आत्मा का अपमान है।

आंदोलनकारियों ने कहा कि मसूरी में 6 आंदोलनकारी और एक पुलिस अधिकारी शहीद हुए थे, चार दर्जन से अधिक लोग जेल गए, तब जाकर उत्तराखंड का सपना साकार हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि “आज जब राज्य बनने के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तो जश्न किसी और जगह क्यों? मसूरी ने चिंगारी दी थी, मसूरी ने कुर्बानी दी थी कृ सम्मान भी यहीं होना चाहिए।

उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के वरिष्ठ नेता शांति प्रसाद भट्ट ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “जिस सोच से उत्तराखंड बना था, वह आज दम तोड़ चुकी है। कांग्रेस और भाजपा ने मिलकर पहाड़ को बर्बाद कर दिया। गांव खाली हो गए, स्कूल बंद हैं, अस्पताल रेफरिंग सेंटर बन चुके हैं और माफिया राज कायम है। भट्ट ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर सैनिक धाम निर्माण में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगाया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को “संविदा मुख्यमंत्री” बताया। उन्होंने कहा कि सरकार मीडिया को नियंत्रित कर अपनी छवि चमका रही है, जबकि असली मुद्दे दबा दिए गए हैं। भट्ट ने संकल्प लिया कि यूकेडी 2027 में बहुमत की सरकार बनाएगी और प्रदेश को “शराब मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त” बनाएगी।

पूर्व मंडी परिषद अध्यक्ष उपेंद्र थापली ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “उत्तराखंड आंदोलन के जो सपने थे कृ रोजगार, शिक्षा, पलायन रोकना कृ वे आज भी अधूरे हैं। उन्होंने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि “धर्म और जाति के नाम पर प्रदेश को बांटा जा रहा है। सरकार भ्रष्टाचार, भूमि और खनन माफियाओं के साथ मिली हुई है। थापली ने दावा किया कि “2027 में जनता कांग्रेस को सत्ता में लाकर भाजपा को उखाड़ फेंकेगी।

धरना स्थल पर आंदोलनकारियों की आवाज एक ही थी कि मसूरी ने राज्य दिया, अब राज्य मसूरी को उसका हक दे। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने मसूरी की उपेक्षा जारी रखी, तो यह धरती फिर से आंदोलन की ज्वाला बनेगी।

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