
सुनील सोनकर (राष्ट्रीय दिया समाचार ) मसूरी
पर्यटन नगरी मसूरी की लाइफलाइन कही जाने वाली देहरादून-मसूरी रोड आज सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि लोगों की परेशानी और राजनीति का केंद्र बन चुकी है। पिछले साल सितंबर में आई आपदा के बाद शिव मंदिर के पास क्षतिग्रस्त पुल की जगह बनाया गया वैली ब्रिज अब राहत से ज्यादा मुसीबत बन गया है। आठ महीने बीतने के बाद भी स्थायी पुल का निर्माण न होना न सिर्फ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि पर्यटन सीजन से ठीक पहले सरकार की तैयारियों की पोल भी खोल रहा है।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने आज सांकेतिक धरना देकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ पुल का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पर्यटन से जुड़ा सवाल है।
कांग्रेस नेता उपेंद्र थापली ने साफ कहा कि मसूरी को जोड़ने वाला यह एकमात्र प्रमुख मार्ग है और यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो पार्टी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित गुप्ता ने आठ महीने बाद भी काम शुरू न होने को प्रशासनिक लापरवाही बताया।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने एक दिलचस्प तुलना करते हुए कहा कि दिल्ली से देहरादून तक का सफर जहां ढाई घंटे में पूरा हो जाता है, वहीं देहरादून से मसूरी पहुंचने में 4 से 5 घंटे लगना अपने आप में सिस्टम की नाकामी को दर्शाता है।
नगर निगम पार्षद सुमेन्द्र बोहरा ने याद दिलाया कि 16 सितंबर की आपदा का सबसे ज्यादा असर मसूरी विधानसभा क्षेत्र पर पड़ा था, लेकिन अब तक ठोस काम नजर नहीं आ रहा। उन्होंने मालसी के पास क्षतिग्रस्त पुल को भी संभावित खतरा बताया।
प्रदेश महासचिव गोदावरी थापली और कांग्रेस नेता मनीष गौनियाल ने चेतावनी दी कि यदि पर्यटन सीजन से पहले स्थायी पुल या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

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