केदारनाथ धाम पैदल मार्ग अपने आप में चुनौतीपूर्ण है, इसका कारण यह है कि तकरीबन 16 से 18 किमी के इस पैदल मार्ग पर चलते समय यात्री कम से कम 3 साधनों का प्रयोग अवश्य करता है। पहला खुद पैदल🚶चले, दूसरा घोड़ा-खच्चर 🏇 🐴 का सहारा लेकर यानि घोड़ा-खच्चर पर सवार होकर चले। तीसरा डण्डी (पालकी) व कण्डी (पिट्ठू) की सहायता से चले।
यदि सभी परिवार जन किसी भी एक माध्यम से सफर प्रारम्भ करें तो ठीक। पर यदि परिवार जनों का केदारनाथ जाने या वापस आने का साधन या माध्यम अलग हो तो स्वाभाविक तौर पर बिछड़ ही जाते हैं। ऐसा ही तो हुआ था आज कि केदारनाथ जाते समय हल्द्वानी, जिला नैनीताल (उत्तराखण्ड) का एक परिवार केदारनाथ धाम दर्शन के लिए आया था, इनका 6 साल का बच्चा आरव (वैभव) जो कि इन्होने नेपाली कण्डी वाले के साथ भेजा था और स्वयं पैदल चल पड़े। बस क्या था, इतने लम्बे पैदल मार्ग पर बिछड़ ही गए। बिछड़ गए तो स्वाभाविक था कि ये परेशान हुए होंगे!!!
मां-पिता आये तो यात्रा पर थे पर परेशानी कुछ और ही हो गयी थी। इनके द्वारा अपनी परेशानी केदारनाथ धाम में तैनात पुलिस को बतायी गयी। चौकी प्रभारी केदारनाथ आशुतोष चौहान ने इनकी समस्या को समझते हुए पुलिस कार्मिकों की 4 टीमें बनाई व बच्चे की ढूंढखोज हेतु रवाना किया गया। निजी होटलों, टैंट काॅलोनी व जीएमवीएन में लगातार पूछताछ व ढूंढखोज करने के उपरान्त पुलिस के हाथ 🖐 सफलता लग ही गयी। पुलिस टीमों ने बालक आरव को बेसकैम्प स्थित पुलिस चौकी केदारनाथ लाया गया। जहां पर मां व बेटे के पुनर्मिलन का एक भावुक दृश्य अपने आप ही बन पड़ा। माता प्रेमा व पिता उदित निवासी हल्द्वानी, जिला नैनीताल, उत्तराखण्ड ने बालक को सकुशल पाकर देवदूत के रूप में अवतरित चौकी केदारनाथ पुलिस (रुद्रप्रयाग पुलिस) का आभार प्रकट कर अपनी आगे की यात्रा के लिए मन्दिर क्षेत्र के लिए प्रस्थान किया गया।

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