
राजीव भार्गव (राष्ट्रीय दिया समाचार ) देहरादून
जिलाधिकारी सविन बसंल के निर्देशन में जिला प्रशासन की टीम द्वारा आज रायपुर क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित गैस गोदाम की भूमि पर भूमि के असली मालिक 97 वर्षीय बुर्जुग महिला एवं उनकी 80 वर्षीय पुत्री को कब्जा दिला दिया है। डीएम के जनता दर्शन कार्यक्रम में संज्ञान में आया था मामला, जिस पर जांच कराते हुए डीएम ने जिला प्रशासन की टीम को मौके पर भेज 03 जनवरी को गैस गोदाम सील करा कराया था। लीज समाप्त होने के बाद भी वर्षों से संचालित किया जा रहा था गैस गोदाम भूमि के असली वारिस अपनी भूमि से कब्जा छुड़ाने हेु 25 वर्षों से सरकारी कार्यालयों एवं कोर्ट कचहरी के चक्कर काट रहे थे। जिलाधिकारी सविन बंसल के मामला संज्ञान में आते ही जांच बिठाई गई थी, जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर प्रशासन ने महिला को भूमि पर संचालित अवैध गैस गोदाम को सील करते हुए बड़ी कार्यवाही की गई थी। आज आखिरकार प्रशासन ने महिला को उनकी भूमि पर कब्जा दिलाकर न्याय की मिशाल पेश की है।
जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी ने आज जिला प्रशासन एवं जिला प्रशासन के इस त्वरित एक्शन से जहां एक शारीरिक रूप से अक्षम 97 वर्षीय बुर्जुग महिला लीला देवी, उनकी 80 वर्षीय पुत्री नीना गुरूंग को न्याय मिला वहीं जिला प्रशासन के प्रति जनमानस का विश्वास बढा है। वहीं अपनी सम्पत्ति की चाबी पकड़ते हुए महिला ने जिलाधिकारी सविन बसंल, एसडीएम कुमकुम जोशी, उनकी टीम को साधुवाद दिया। डीएम ने अवैध रूप से संचालित हो रहे गैस गोदाम का अविलम्ब लाईसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से पूछा कि इतने लम्बे समय से जिम्मेदार विभागों ने क्यों नही की, विभागीय अधिकारियों के प्रकरण पर संज्ञान न लिए जाने पर हैरानगी जताते हुए कहा कि विभागीय अधिकारी एवं नियम कहां थे क्यों नही लिया गया सख्त एक्शन। अवैधरूप से संचालित गैस गोदाम का लाईसेंस निरस्त करने की तैयारी, अविलम्ब लाईसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए थे। महिला ने अपनी शिकायत पत्र के माध्यम से बताया कि रायपुर में उनकी स्थिति को देखते हुए रांझावाला रायपुर में उनकी 12 हजार वर्ग फीट भूमि पर भूमाफिया की नजर है। इस अवैध कब्जा कर गैस एजेंसी का संचालन किया जा रहा है। उनके पति द्वारा वर्ष 1988 में 10 वर्ष की लीज पर गैस गोदाम संचालित करने हेतु दिया गया था, जिसकी लीज समाप्त होने के बाद भी वर्ष 2000 से किराया देना बंद कर दिया तथा अभिलेखों में हेरफेर कर भूमि अपने नाम कर दी प्रकरण को गंभीरता से लेते डीएम ने स्पष्ट जांच के साथ उचित कार्यवाही के निर्देश दिए थे।

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