
सुनील सोनकर (राष्ट्रीय दिया समाचार) मसूरी
पहाड़ों की रानी मसूरी में टिहरी बाइपास रोड स्थित वायनबर्ग एलेन स्कूल की भूमि पर बनी बाबा बुल्ले शाह की मजार और आसपास मौजूद अन्य मजारों को लेकर शुक्रवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब बजरंग दल के कार्यकर्ता मजार परिसर में पहुंचे और विरोध प्रदर्शन करते हुए जमकर हंगामा किया। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मसूरी प्रशासन, पुलिस और नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पहले यहां केवल एक ही मजार थी, लेकिन समय के साथ अब दर्जनों मजारें बना दी गई हैं। उनका कहना है कि यह एक “सोची-समझी साजिश” के तहत किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि यदि स्कूल प्रबंधन द्वारा मजार के लिए भूमि दी जा सकती है, तो उसी स्थान पर हनुमान मंदिर या माता के मंदिर के निर्माण की अनुमति भी दी जानी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और जिला प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो संगठन अपने स्तर से मजारों को हटाने की कार्रवाई करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
मौके पर पहुंचे नगर पालिका कर अधीक्षक अनिरुद्ध चौधरी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि बाबा बुल्ले शाह की मजार किसी भी प्रकार की सरकारी या वन विभाग की भूमि पर नहीं है, बल्कि यह पिछले करीब 50 वर्षों से निजी संपत्ति पर स्थापित है। उन्होंने बताया कि संबंधित भूमि वन बाग एलेन स्कूल की है और स्कूल प्रबंधन की प्रत्येक बोर्ड बैठक में मजार के विषय पर चर्चा होती रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मजार के संबंध में जो भी तथ्य हैं, उनकी पूरी जानकारी शासन-प्रशासन को भेजी जाएगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी भी व्यक्ति या संगठन को नहीं है और किसी भी तरह की अवैध कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने के बाद स्थिति शांत हुई, हालांकि मामला अभी भी संवेदनशील बना हुआ है। स्थानीय लोगों में भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। एक ओर धार्मिक आस्था का सवाल उठाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कानून व्यवस्था और निजी संपत्ति के अधिकारों को लेकर प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसी भी तरह के टकराव से बचने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इस विवाद को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

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