
सुनील सोनकर(राष्ट्रीय दिया समाचार)मसूरी
मसूरी। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जॉर्ज एवरेस्ट जाने वाले रास्ते को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। आम रास्ते पर प्रवेश और कथित शुल्क वसूली को लेकर स्थानीय लोगों और जॉर्ज एवरेस्ट प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। इसी क्रम में शनिवार को नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी, पालिका अधिकारियों और जॉर्ज एवरेस्ट संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंचीं।
इस दौरान जॉर्ज एवरेस्ट के गेट पर तैनात निजी सुरक्षा गार्डों ने पालिका अध्यक्ष, अधिकारियों और मीडिया कर्मियों को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की। आरोप है कि गार्डों द्वारा मीडिया कर्मियों के साथ अभद्रता भी की गई, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों, मीडिया कर्मियों और गार्डों के बीच जमकर नोकझोंक हुई।
पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी के हस्तक्षेप के बाद स्थिति कुछ हद तक शांत हुई और पालिका कर्मचारियों के साथ कुछ मीडिया कर्मियों को गेट के अंदर जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद पालिका अध्यक्ष ने अधिकारियों के साथ जॉर्ज एवरेस्ट से जुड़े मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जॉर्ज एवरेस्ट से लगा यह मार्ग पूर्व से ही आम रास्ता रहा है, जिस पर आमजन और पर्यटकों के आवागमन का अधिकार है। पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने स्पष्ट कहा कि यह रास्ता सार्वजनिक है और इसे निजी बताकर किसी को रोकना या शुल्क लेना अवैध है।
10 दिन में रास्ता खोलने का अल्टीमेटम
पालिका अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले में कंपनी प्रबंधन, पर्यटन विभाग और संबंधित उच्च अधिकारियों से सभी दस्तावेजों के आधार पर वार्ता की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 10 दिन का समय दिया जा रहा है। यदि इसके बाद भी जॉर्ज एवरेस्ट आने-जाने के लिए आम रास्ता नहीं खोला गया या शुल्क वसूली जारी रही, तो नगर पालिका अपने स्तर से सख्त कार्रवाई करेगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों की अनदेखी होने पर जॉर्ज एवरेस्ट जाने वाले रास्ते को प्रशासनिक स्तर पर पूर्ण रूप से बंद भी किया जा सकता है। पालिका अध्यक्ष ने कहा कि मसूरी शहर में न तो स्थानीय लोगों का शोषण होने दिया जाएगा और न ही पर्यटकों से जबरन उगाही बर्दाश्त की जाएगी।
हाईकोर्ट के निर्देशों का भी होगा अध्ययन
मीरा सकलानी ने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों का भी गहन अध्ययन किया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कौन सा रास्ता आम है और कौन सा निजी संपत्ति के अंतर्गत आता है। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि भूमि हस्तांतरण के दौरान कंपनी को किसी भी प्रकार का आम रास्ता नहीं दिया गया था। ऐसे में नगर पालिका ही सार्वजनिक रास्तों की स्वामी है।
सभासद और संघर्ष समिति का समर्थन
पालिका सभासद जसवीर कौर ने पालिका अध्यक्ष के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट पर आने-जाने से किसी को नहीं रोका जा सकता। यह आम रास्ता है और स्थानीय लोग लंबे समय से इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद कंपनी उनका पालन नहीं कर रही, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
संघर्ष समिति के सदस्य भगत सिंह कठैत ने कहा कि जॉर्ज एवरेस्ट मार्ग की लड़ाई लंबे समय से लड़ी जा रही है। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार कंपनी न तो किसी को रोक सकती है और न ही किसी प्रकार का शुल्क ले सकती है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी तानाशाही रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि यदि 10 दिन के भीतर आम रास्ता नहीं खोला गया और शुल्क वसूली बंद नहीं हुई, तो संघर्ष समिति द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा और कंपनी के खिलाफ उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका भी दायर की जाएगी।
फिलहाल, जॉर्ज एवरेस्ट मार्ग को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। वही इस पूरे मामले में कोग्रेस नेता डा. सोनिया आनंद रावत ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि भाजपा की भ्रष्ट सरकार द्वारा बाबा रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण की कम्पनी को सभी नियमों को ताक पर रखकर करोडों की जार्ज एवरेस्ट की करोड़ों की जमीन को औने पौने दाम पर मात्र एक करोड साल की लीज पर दे दिया गया है व कम्पनी द्वारा पर्यटकों को स्थानीय लोगों से जार्ज एवरेस्ट पर जाने के लिये अवैध रूप से शुल्क लिया जा रहा है व हाई कोर्ट के निर्देशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर कम्पनी द्वारा जॉर्ज एवरेस्ट रास्ते पर शुल्क लेना बंद नहीं किया गया जो कांग्रेस पार्टी आने वाले समय पर प्रदेशभर में जार्ज एवरेस्ट को लेकर उग्र आंदोलन करने के लिये मजबूर होगी। इस मौके पर जगपाल गुसाई, प्रकाश राणा, शोएब सहित कई लोग मौजूद थे।

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