इंसान की मौत भी मायने नहीं रखती, कुंभकरण की नींद सो रहे विभाग, पहाड़ों में मौत का सिलसिला आखिर कब तक चलेगा
पहाड मे एक और सड़क दुर्घटना और फिर वही रटी रटाई कानूनी कार्रवाई। मजिस्ट्रेट जांच और प्रभावित परिवारों को मुआवजा। लेकिन नहीं सुधरेंगे तो वह हालात जिसकी जिम्मेदारियां परिवहन एवं पुलिस विभाग के सिर पर हैं। तमाम दुर्घटनाओं के बावजूद ओवरलोडिंग के कानून पर कुंभकरण की नींद ली जा रही है। ना तो आरटीओ और ना ही संबंधित क्षेत्रों की थाना चौकी पुलिस और लोडिंग वाहनों पर कार्रवाई करने को तैयार है। विभागीय उदासीनता देखकर मानो लगता है कि इंसानी जिंदगी के चले जाने के बाद भी संवेदनहीन बन चुके इन विभागों पर कोई फर्क ही नहीं पड़ता।
विजयदशमी से 1 दिन पूर्व उत्तराखंड के पौड़ी जनपद में वह दर्दनाक हादसा सामने आया जिसने पूरे देश को गमगीन कर दिया। प्राकृतिक हादसों के बीच उत्तराखंड में एक और बड़ी घटना सामने आई जिसमें बारातियों की बस गहरी खाई में जा गिरी। बीरोंखाल के सिमड़ी में हुए बस हादसे में मृतकों की संख्या 33 तक पहुंच गई। इनमें से वाहन चालक समेत 31 लोगों के शव खाई से निकाले जा चुके थे।
बताते हैं कि 30 सीटर बस में चालक समेत 50 से भी अधिक बाराती बैठे हुए थे। गौरतलब है कि औवरलोड वाहन मे ना तो ब्रेक पूरी क्षमता से काम करते है ना स्टेयरिंग जिसके चलते बस एक मोड़ पर अनियंत्रित हो गई और एक और बड़ा हादसा, उत्तराखड मे होने वाली दुर्घटनाओं की श्रेणी में दर्ज हो गया। इस दुर्घटना के बाद भी कुछ बैठके होंगी, दिशा निर्देश जारी होंगे लेकिन फिर वही पुराना ढर्रा देखने को मिलेगा। अपनी जिम्मेदारियों के प्रति नागरिकों को भी सचेत होना होगा एवं चंद प्रयास तो खुद भी ऐसे करने होंगे जिन से दुर्घटनाओं पर कुछ हद तक अंकुश लगाया जा सके। इनमें सर्वप्रथम ओवरलोडिंग से बचने एवं चालक की स्थिति जाननी बेहद जरूरी है।
परिवहन व्यवस्थाओं के प्रति जब तक शासन प्रशासन एवं इनका उपयोग करने वाले सचेत नहीं होंगे तब तक ऐसे दर्दनाक हादसों के हम या तो गवाह बनेंगे या खुद इनके शिकार। अब देखने वाली बात ये है कि संबंधित विभाग इस भयावह दुर्घटना जिसने दर्जनो घरो के चिराग हमेशा हमेशा के लिए बुझा दिये से कोई सबक लेता है या फिर यू ही आखिर नाक और कान बंद कर एक और दुर्घटना का इंतजार करता है

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